द्वारका जिले के बाबा हरिदास नगर इलाके में शनिवार देर रात एक ट्रेडिंग कार्यालय में संदिग्ध हालत में आग लग गई। आग में झुलसकर कार्यालय मालिक की मौत हो गई। मृतक सीआरपीएफ के रिटायर जवान थे और ट्रेडिंग का काम कर रहे थे। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची दमकल की तीन गाड़ियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। पुलिस आग लगने के कारणों की जांच में जुटी है। मृतक की शिनाख्त अरुण कुमार (40) के रूप में हुई है।
वह परिवार के साथ बंगाली कॉलोनी में रहते थे। वह सीआरपीएफ में बतौर हवलदार व रेडियो ऑपरेटर तैनात थे। 28 फरवरी को सेवानिवृत हुए थे। परिवार में पत्नी शीतल बेटा गुन्नु और बेटी प्रिंसी है। बेटा छठी कक्षा में पढ़ता है। जबकि बेटी 12 कक्षा की छात्रा है। अरुण मूलत: लोनी गांव, नारनोल हरियाणा के रहने वाले थे। वह अर्धसैनिक बलों के लिये टोपी व अन्य सामान सप्लाई करने का काम करते थे।
उन्होंने अपने घर के सामने अपना कार्यालय बनाया हुआ था। इसमें 10 कर्मचारी काम करते थे। शनिवार देर रात 2.21 बजे बाइक सवार राहगीरों ने दमकल विभाग को अरुण के कार्यालय में आग लगने की सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। तलाशी के दौरान कार्यालय से अरुण का शव झुलसी अवस्था में मिला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
छानबीन के दौरान परिवार वालों ने पुलिस को बताया कि रात 12 बजे उन्होंने पत्नी को फोन कर बताया कि उसके कुछ जानकार कार्यालय आने वाले हैं। उनसे बातचीत कर वह देर से घर आएंगे। इसलिए वे लोग खाना खाकर सो जाएं। देर रात दमकल की गाड़ियों की आवाज सुनकर उनकी नींद खुली। उन लोगों ने कार्यालय में आग लगी हुई देखी।
आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गाटर से बनी छत फट गई थी। पुलिस को पता चला कि रात दस बजे तक उनके सारे कर्मचारी कार्यालय में मौजूद थे। पुलिस घटना को संदिग्ध मान रही है। पुलिस का कहना है कि कार्यालय में कोई ज्वलनशील पदार्थ नहीं था, फिर आग इतनी भयावह कैसे हो गई।
आग लगने के बाद अरुण बाहर क्यों नहीं निकल पाया। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आग लगने की सूचना देने वाले बाइक सवार कौन थे। पुलिस इन सब गुत्थियों को सुलझाने का प्रयास कर रही है।