नई ईवी नीति के लांच होने के महज दो साल में ही दिल्ली की कुल गाड़ियों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 9.3 फीसदी से अधिक है। प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली सरकार की ओर से दिए जा रहे वित्तीय प्रोत्साहन से ई-वाहनों की बिक्री का ग्राफ लगातार चढ़ रहा है।
खास बात यह है कि नीति के लागू होने के बाद से अब तक दुपहिया ई-वाहनों की बिक्री में करीब आठ गुना इजाफा दर्ज किया गया है। सरकार का लक्ष्य 2024 तक दिल्ली में पंजीकृत होने वाले वाहनों में 25 फीसदी ई-वाहनों की हिस्सेदारी का लक्ष्य है। अगस्त, 2020 में दिल्ली सरकार ने नई ईवी नीति को लागू की थी।
इसके बाद से ई-वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी के लिए अलग-अलग वाहनों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन की घोषणाएं भी की गईं। ई-रिक्शा, ई-ऑटो, ई-बाइक, कार के बाद इस साल में 150 ई-बसें भी सड़क पर उतर चुकी हैं। सार्वजनिक वाहनों के तौर पर ई-बसों की सेवा शुरू होने के बाद दिल्लीवासियों में भी रुझान बढ़ने लगा है।
सितंबर, 2020 से 30 जून 2022 के बीच दिल्ली में करीब 56600 ई-वाहन बिके। इनमें 23 हजार (40.7 फीसदी) से अधिक ई-स्कूटर और बाइक हैं। परिवहन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक दुपहिया वाहनों की अधिक मांग और कम कीमत के कारण इसमें सर्वाधिक बढ़ोतरी हुई है। ई वाहनों में करीब 34.8 फीसदी ई-रिक्शा समेत दूसरे वाहन शामिल हैं।
कोरोना के बाद बिक्री में रफ्तार
सरकार का लक्ष्य दिल्ली में बिकने वाले कुल वाहनों में 2024 तक ई-वाहनों की हिस्सेदारी 25 फीसदी तक पहुंचाने का है। कोरोना काल में सभी वाहनों की बिक्री के साथ साथ ई वाहनों की बिक्री भी घटकर 2.9 फीसदी तक पहुंच गई। नई ईवी पॉलिसी के लागू होने के बाद कई तरह के वित्तीय प्रोत्साहन मिलने से ई वाहनों की बिक्री ने दोबारा रफ्तार पकड़ ली है। जनवरी से जून के बीच दिल्ली में 25890 ई वाहनों की बिक्री हुई। कुल पंजीकृत होने वाले वाहनों में 9.3 फीसदी ई वाहन हैं। दोपहिया ई वाहनों की संख्या में आठ गुना की बढ़ोतरी के साथ ही सरकार दूसरे वाहनों को भी लगातार प्रोत्साहित कर रही है।
रोजा औसतन 143 ई-वाहन पंजीकृत
बिक्री में बढ़ोतरी के बाद फिलहाल दिल्ली में रोजाना औसतन 143 ई-वाहन पंजीकृत होते हैं। वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी को देखते हुए यह माना जा रहा है कि आने वाले कुछ वर्षों में दिल्ली, देश की ईवी राजधानी बन जाएगी। इसके लिए सरकार ने कैब और डिलीवरी सेवा से जुड़ी एजेंसियों को 2030 तक सभी वाहनों को ई वाहनों में बदलने का निर्देश दिया है। इससे भी वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी होने से प्रदूषण स्तर में सुधार होगा।