दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में बिस्तरों की कमी लंबे समय से देखने को मिल रही है। इसके चलते अक्सर मरीजों को एक से दूसरे अस्पताल रैफर तक होना पड़ता है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार ने इस समस्या को दूर करने के लिए 20 हजार बिस्तर बढ़ाने की घोषणा भी की है। हालांकि, पिछले नौ साल में एक हजार दिल्ली वालों के लिए अस्पताल में केवल 2.74 बेड ही उपलब्ध हैं। जबकि बाहरी राज्यों से आने वालों की संख्या इससे अलग है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार दिल्ली में एक हजार लोगों पर कम से कम पांच बिस्तर की व्यवस्था जरूर होनी चाहिए लेकिन वर्ष 2011 से 2019 के बीच प्रति हजार बिस्तरों का अनुपात 2.51 से बढ़कर 2.74 तक पहुंचा है। जबकि वर्ष 2018 से 2019 के बीच तुलना करें तो नौ साल में सबसे बड़ी गिरावट भी इसी बीच देखने को मिली है। वर्ष 2017 और 2018 में एक हजार लोगों पर बिस्तरों की संख्या क्रमश: 2.99 और 2.96 थी जोकि 2019 तक बढने की जगह घटकर 2.74 हो गई।
सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 की रिपोर्ट में पता चला है कि दिल्ली में 1267 चिकित्सीय संस्थान हैं जहां 54321 बिस्तरों की क्षमता है। इनमें 22.57 फीसदी भागेदारी केंद्रीय अस्पताल (एम्स, सफदरजंग, सैन्य, ईएसआई) की है। जबकि दिल्ली सरकार के 22.94 फीसदी बिस्तर हैं। नगर निगम की बात करें तो 6.82 फीसदी बेड उन्हीं के अधीन अस्पतालों में हैं। बाकी 47.67 फीसदी बेड प्राइवेट अस्पतालों से हैं।
आठ साल बाद तीन में से दो अस्पताल शुरू
वर्ष 2013 और 2014 के दौरान दिल्ली में तीन बड़े अस्पताल बनाने का काम शुरू हुआ। समय और सरकार के साथ इन अस्पतालों का प्रस्ताव बदलता गया और अब आठ साल बाद कोरोना महामारी की लड़ाई में दो अस्पतालों का इस्तेमाल शुरू हुआ। दिसंबर 2013 में अंबेडकर नगर स्थित अस्पताल का निर्माण शुरू हुआ। पहले यह 200 बिस्तर का बनना था लेकिन इसके बाद बजट में बढ़ोतरी कर बिस्तरों की संख्या तीन गुना 600 की गई। पिछले वर्ष 15 जुलाई को कैबिनेट ने अस्पताल खोलने की मंजूरी दी थी। ठीक इसी तरह अगस्त 2014 में द्वारका सेक्टर 17 में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज का बनना शुरू हुआ। पहले यह 700 बिस्तर का बनना था लेकिन अब यह 1725 बिस्तर का होगा। पिछले साढ़े छह साल से निर्माण कार्य चल रहा है और अब तक 87 फीसदी काम पूरा हो चुका है। फरवरी 2013 से बुराड़ी अस्पताल भी बन रहा था। यहां भी 200 की जगह 768 बिस्तर किए जाने के बाद पिछले वर्ष 26 जून को कैबिनेट से अनुमति मिली।
दिल्ली के नए अस्पताल
मादीपुर में 600 बिस्तर की क्षमता वाला अस्पताल बनाया जा रहा है। अभी तक यहां काम शुरू नहीं हुआ है। सिरसापुर में 2716 बेड का ट्रामा सेंटर बनना है जिसके लिए 487 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित किया जा चुका है। सरिता विहार में 300, विकासपुरी में 691 और नांगलोई में भी 691 बेड की क्षमता वाला अस्पताल बनने जा रहा है। हालांकि इसके लिए दिल्ली वालों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
पिछले साल यहां मिली है कामयाबी
. दिसंबर 2020 तक 496 आम आदमी मोहल्ला क्लिनिक स्थापित किए। जबकि लक्ष्य 750 क्लिनिक का था।
. दिल्ली में औसतन प्रत्येक आम आदमी मोहल्ला क्लिनिक प्रतिदिन 97 रोगियों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराता है।
. वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 9 से 11 महीने की आयुवर्ग के लगभग 1.82 लाख बच्चों का पूर्ण टीकाकरण किया। जबकि वार्षिक लक्ष्य 2.96 लाख बच्चों के टीकाकरण का था।
. आशा कार्यकर्ताओं ने 1.20 लाख संस्थागत प्रसव कराए।
. दिसंबर 2020 तक टीबी से ग्रस्त 59,646 रोगियों का उपचार किया गया।
. दिसंबर 2020 तक औषधि नियंत्रण विभाग ने लगभग 3073 बिक्री कंपनियों का निरीक्षण किया और नियमों का उल्लंघन करने वाले 397 के लाईसेंस निलंबित या रद्द किए।