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Delhi News: सुबह सांसों पर धूल का वार, दोपहर में ओजोन की मार

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सीपीसीबी के वर्ष 2015 से उपलब्ध प्रति घंटे के वायु गुणवत्ता आंकड़ों का किया गया विश्लेषण
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थिंक टैंक एनवायरोकैटलिस्ट्स द्वारा तैयार किया गया अध्ययन

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या केवल मौसम के अनुसार ही नहीं बदलती, बल्कि दिन के अलग-अलग समय में भी प्रदूषकों का स्तर अलग-अलग रहता है। एक नए विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि सुबह के समय हवा में सूक्ष्म धूल कण (पीएम2.5 और पीएम10) अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि दोपहर के समय ओजोन गैस का स्तर बढ़ जाता है। थिंक टैंक एनवायरोकैटलिस्ट्स द्वारा तैयार किए गए एक अध्ययन में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के वर्ष 2015 से उपलब्ध प्रति घंटे के वायु गुणवत्ता आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में गर्मियों और सर्दियों के दौरान प्रदूषकों के स्तर में होने वाले बदलावों की तुलना की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, गर्मियों में पीएम2.5 का स्तर सुबह 9 बजे के आसपास सबसे अधिक दर्ज किया गया। इसके बाद दिन चढ़ने के साथ यह कम होने लगता है और शाम तक काफी नीचे आ जाता है। दूसरी ओर, सर्दियों में पीएम2.5 का स्तर पूरे दिन ऊंचा बना रहता है और रात के समय इसमें और बढ़ोतरी देखी जाती है। यह प्रदूषक सबसे खतरनाक माना जाता है क्योंकि इसके सूक्ष्म कण फेफड़ों के भीतर तक पहुंचकर रक्त प्रवाह में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, पीएम10 के स्तर में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। गर्मियों में इसका स्तर सुबह और देर रात सबसे अधिक रहा, जबकि सर्दियों में यह लगभग पूरे दिन सुरक्षित मानकों से ऊपर दर्ज किया गया। अध्ययन में पाया गया कि सर्दियों में प्रदूषण का स्तर गर्मियों की तुलना में काफी अधिक होता है।
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सूर्य की तेज रोशनी और रासायनिक प्रतिक्रियाओं से होता है ओजोन का निर्माण
विश्लेषण में यह भी सामने आया कि ओजोन का स्तर दोपहर के समय सबसे अधिक होता है। गर्मियों में दोपहर 3 से 4 बजे के बीच ओजोन अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाती है। एनवायरोकैटलिस्ट्स की क्लीन एयर प्रोग्राम मैनेजर जिनीथा वर्गीस ने बताया कि सुबह के समय बढ़ता प्रदूषण ट्रैफिक, सड़क की धूल और बढ़ती मानवीय गतिविधियों का परिणाम है। वहीं, सर्दियों में रात के समय प्रदूषण बढ़ने का कारण वाहनों और उद्योगों से निकलने वाला धुआं तथा मौसम की स्थिर स्थिति होती है। उन्होंने बताया कि सूर्य की तेज रोशनी और रासायनिक प्रतिक्रियाओं के कारण ओजोन का निर्माण होता है। इसके अधिक संपर्क से खांसी, गले में जलन, सीने में जकड़न और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। उनका कहना है कि इस स्थिति को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण के उपाय भी समय के अनुसार तय किए जाने चाहिए।
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