दिल्ली विश्वविद्यालय में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की तर्ज पर ड्रामा और थियेटर की पढ़ाई कराए जाने की तैयारी की जा रही है। डीयू म्यूजिक और फाइन आर्ट विभाग का मेकओवर कर इसमें ड्रामा और थियेटर को भी जोडने की योजना बना रहा है। इसकेसाथ ही विवि इस में पेटिंग, मूर्तिकला को भी जोडने का प्रयास कर रहा है। डीयू का यह विभाग काफी पुराना है और विवि इसमें बाजार की जरुरत के हिसाब से बदलाव करना चाह रहा है। इससे विभाग का दायरा भी बढ़ जाएगा।
दिल्ली विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो पीसी जोशी ने कहा कि दो विभागों पर्शियन विभाग व म्यूजिक एंड फाइन आट्र्स विभाग का मेकओवर करने की योजना है। इस योजना केतहत पर्शियान विभाग का दायरा बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसकेजरिए विद्यार्थियों को उजबेकिस्तान, कजाकिस्तान जैसे देशों की संस्कृति, भाषा को सिखाने पर फोकस करेंगे। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद(आईसीसीआर) इसमें सहायता करेगा।
वहीं हमारी भविष्य में योजना है कि म्यूजिक एंड फाइन आट्र्स का भी मेकओवर किया जाए। हम इस विभाग केदायरे को बढ़ाना चाहते हैं। इसमें ड्रामा, थियेटर, मूर्तिकला, पेटिंग को भी जोडने की योजना है। एनएसडी(नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) एक प्रतिष्ठित संस्थान है। वहां जैसी पढ़ाई तो नहीं लेकिन प्रयास है कि ड्रामा और थियेटर में विद्यार्थियों को पारगंत किया जा सके।
प्रो जोशी ने कहा कि डीयू का यह विभाग काफी पुराना है और इसमें थोड़ी कमी लगी। इसका दायरा बढ़ाने की जरुरत महसूस हो रही है। अभी इस विभाग के अंतर्गत अभी डिग्री प्रोग्राम के तहत बीए ऑनर्स म्यूजिक, एमए म्यूजिक, एमफिल म्यूजिक, पीएचडी प्रोग्राम की पढ़ाई होती है। जबकि डिप्लोमा प्रोग्राम के तहत संगीत शिरोमणि डिप्लोमा कोर्स, दो वर्षीय डिप्लोमा(हारमोनियम) व शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्सेज की पढ़ाई करायी जाती है।