फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैंसर पीड़ित बच्चों का इलाज होगा आसान, परिजन शुरूआती लक्षणों पर दें ध्यान

Wed, 03 Mar 2021 11:33 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
डॉ. गौरी कपूर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
बचपन में कैंसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिल्ली स्थित राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एवं रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) नीति बाग की मेडिकल डायरेक्टर, और निदेशक बाल चिकित्सा हेमाटोलॉजी एवं ऑन्कोलॉजी डॉ. गौरी कपूर ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2030 तक 60 प्रतिशत कैंसर पीड़ित बच्चों को जिंदगी की जंग में विजयी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
विज्ञापन


डॉ. गौरी कपूर ने बताया कि बच्चों में होने वाले कैंसर में सबसे आम ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर), लिंफोमा और मस्तिष्क या पेट में ट्यूमर हैं। इनके अतिरक्त ब्रेन एवं अन्य सेंट्रल नर्वस सिस्टम ट्यूमर, न्यूरोब्लास्टोमा, रैब्डोमायोसरकोमा, रेटिनोब्लास्टोमा, हड्डी के कैंसर आदि भी बच्चों को होने वाले कैंसर हैं। 

उन्होंने बताया कि कैंसर के लक्षण को पहचानना मुश्किल होता है क्योंकि ये सामान्य बीमारी की तरह होते हैं जैसे सुस्ती, कमजोरी, चक्कर आना, पीठ, पैर, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, रक्तस्त्राव, मसूढ़ों से खून आना, भूख न लगना, वजन घटना, पेट में सूजन, पेटदर्द, कब्ज, सांस लेने में कठिनाई, लगातार खांसी, पुतली के पीछे सफेद रंग आदि। 
विज्ञापन


इसलिए इसमें से कोई लक्षण होने पर अस्पताल में जांच जरूरी है और थोड़ा भी शक होने पर कैंसर अस्पताल में जांच करानी चाहिए। कैंसर का सही समय पर पता लगा लिया जाए तो उपचार संभव है।

गलत खान-पान व खराब लाइफस्टाइल के चलते बच्चों में भी कैंसर की शिकायत पाई जा रही है। डॉ. कपूर ने कहा कि माता-पिता द्वारा बच्चों को लाइफस्टाइल सही रखने एवम् उनमें अच्छी आदतें डालकर कई तरह के कैंसर से बचा जा सकता है। स्वस्थ भोजन, हरी सब्जियां खाने की आदत, सही टाइम टेबल, नियमित रूप से एक्सरसाइज करना आदि को अपनाकर वे बच्चों को अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रेरित कर सकते हैं। 

उन्होंने आगे बताया कि बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य लिए उनके अभिभावकों का जागरूक होना आवश्यक है। उन्हें कैंसर से जुड़े प्रारंभिक लक्षणों की जानकारी रखनी चाहिए और यदि बच्चे का शारीरिक, मानसिक विकास सामान्य रूप से न हो रहा हो, कम वजन होने लगे, अचानक रक्त स्राव हो अथवा शरीर के किसी हिस्से में गांठ उभरने लगे तो सचेत हो जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें