‘हमारा पास में ही घर है। मेरे पापा मकान बनाते हैं। उन्हें दिल की बीमारी है। साल 2018 में जीबी पंत अस्पताल में उनकी बायपास सर्जरी हुई थी। तीन महीने पहले उन्हें कोरोना हुआ। लोकनायक अस्पताल में भर्ती होने के बाद पता चला कि पापा को ओमिक्रॉन वायरस ने जकड़ा है।
हम सभी घबरा गए थे, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि उनके पिता ने टीके की दोनों खुराक ले रखी हैं। इसलिए ज्यादा चिंता की बात नहीं है। स्थिति में सुधार हो रहा है। करीब 15 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई। मुझे भी अस्थमा है। हर साल मुझे प्रदूषण बढ़ने पर काफी दिक्कत होती है। मैंने सुना है जिन्हें पहले से बीमारी होती है उनमें कोरोना का जोखिम काफी ज्यादा है। इसलिए मैं अपने पिता के साथ यहां आई हूं।’
यह कहना है 15 वर्षीय लीना वर्मा का, जो बदरपुर खादर स्थित टीकाकरण केंद्र में कोवाक्सिन का टीका लगवाने पहुंची थी। कुछ दिन से उसे वायरल बुखार के साथ अस्थमा से जुड़ी परेशानी हो रही थी। लीना बताती हैं...‘ये मेरी दूसरी खुराक है। मैंने पहली डोज इसी महीने पहली तारीख को ली थी।’ दिल्ली के बाकी बच्चों से अपील करते हुए लीना ने कहा कि टीके ने ही उसके पिता की जान बचाई है। इसलिए सभी को जल्द से जल्द टीकाकरण करा लेना चाहिए।
इसी केंद्र पर लीना के ठीक नजदीक बैठे सुमित भी एक जन्मजात रोग ग्रस्त हैं। सर गंगाराम अस्पताल में ईडब्ल्यूएस कोटे से उनका करीब 10 वर्ष पहले उपचार हुआ था। जन्म के बाद उनके दिल में छेद बताया गया था। फिलहाल वह स्वस्थ हैं और वे भी यहां दूसरी खुराक लेने के लिए पहुंचे। सुमित ने बताया कि 25 फरवरी को उन्होंने पहली खुराक ली थी। 15 वर्षीय सुमित ने कहा...‘मैं पहले से अस्वस्थ हूं। इसलिए मेरा टीकाकरण कराना बहुत जरूरी था। मैंने अखबारों में पढ़ा था कि कैसे यह बीमारी जानलेवा बन सकती है और किस तरह अपना बचाव किया जा सकता है?’
आंकड़ों पर एक नजर : स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दिल्ली में अब तक 3.25 करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकरण हो चुका है। फिलहाल 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की कुल वयस्क आबादी में तीन करोड़ टीकाकरण पूरा हुआ है। 12 से 14 वर्ष की आयु के 3.60 लाख बच्चे पहली खुराक ले चुके हैं। इनके अलावा 15 से 17 वर्ष की आयु के किशोरों में 17.60 लाख टीकाकरण हुआ है। दिल्ली सरकार के अनुसार, किशोर टीकाकरण में पहली खुराक का लक्ष्य करीब 90 फीसदी पूरा हो चुका है, जबकि 60 फीसदी से अधिक किशोर दूसरी खुराक भी ले चुके हैं।
‘बीमारी का भरोसा नहीं, जल्द कराएं टीकाकरण’
लीना ने कहा कि कोरोना बीमारी का कोई भरोसा नहीं है। यह कब सामने आ जाए? कोई नहीं जानता। इसलिए लोगों को टीकाकरण कराने में देरी नहीं करनी चाहिए। अभी संक्रमण कम है तो ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीका लगवाना चाहिए। पिछले साल पड़ोस में उनकी दोस्त रिचा के माता-पिता की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई थी। उस घटना के बाद आसपास के सभी लोग काफी डर गए थे। अब रिचा के साथ उसकी मौसी रहती हैं। टीकाकरण शुरू होने के बाद उनकी पूरी गली के बड़े व्यक्तियों ने एक ही दिन में टीका लगवा लिया था।
पांच लाख एहतियाती खुराक भी लगीं : कोरोना टीकाकरण के साथ-साथ एहतियाती यानी तीसरी खुराक का टीकाकरण भी तेजी से बढ़ रहा है। अब तक 4.89 लाख एहतियाती खुराक दी गई हैं। ये खुराक फ्रंटलाइन वर्कर, स्वास्थ्यकर्मी और 60 वर्ष या उससे अधिक आयु वालों को दी जा रही हैं। एक अनुमान के अनुसार, करीब 10 लाख लोगों को एहतियाती खुराक लगनी है, जिनमें से 48 फीसदी लक्ष्य अब तक पूरा हुआ है।