ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन की ओर से स्वपना ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान पूरा साल प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के तहत मोमबत्ती और दीये बनाना, पेपर क्राफ्टिंग, बेकरी, अंग्रेजी बोलना सिखाया जाता है।
मेरे खुद के जीवन में वर्षों से अंधेरा छाया हुआ है, लेकिन जब हर दिवाली दूसरों के घरों में मेरे बनाए दीये उजियारा फैलाते हैं तो मेरा अपना अंधियारा ओझल हो जाता है। यह कहते ही लाल बहादुर शास्त्री मार्ग स्थित ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन में प्रशिक्षण ले रहे राजेश के चेहरे पर मुस्कान की लकीर खिंच जाती है। यह काम सिर्फ राजेश ही नहीं, बल्कि यहां प्रशिक्षण ले रहे करीब 35 मूक-बधीर और दृष्टिबाधित भी कर रहे हैं, जिनके बनाई मोमबत्तियां और दीयों से इस दिवाली हजारों घर में उजियारा फैलेगा।
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नई दिल्ली इलाके में ओबरॉय होटल के नजदीक हर साल दिवाली पर मेले का आयोजन किया जाता है। यहां मूक-बधीर और दृष्टिबाधितों द्वारा बनाए गए उत्पादों की बिक्री की जाती है। ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन की ओर से स्वपना ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान पूरा साल प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के तहत मोमबत्ती और दीये बनाना, पेपर क्राफ्टिंग, बेकरी, अंग्रेजी बोलना सिखाया जाता है। बिक्री से जो पैसा प्राप्त होता है, उसे दृष्टिबाधितों और मूक-बधीर के प्रशिक्षण में इस्तेमाल किया जाता है।
80 तरह के दीये और मोमबत्तियां
प्रशिक्षुओं ने रात-दिन मेहनत कर इस बार 80 तरह के दीये और मोमबत्तियां बनाईं हैं। इनमें पानी में तैरने वाली मोमबत्ती, डीप मोमबत्ती, गियर मोमबत्ती, डमरू गणेश, चौखरी, घुंघरू मंदिर, हाथी दीया, मोर दिया, हरियाली दीया, कलश दीया, दिवाली मोर दीया, लालटेन, स्वास्तिक दीया, रथ दीया, फूल मोमबत्ती, कमल मोमबत्ती, बांबशेल मोमबत्ती और मशाल आदि प्रमुख हैं।