दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के पास नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं (सीएआर) का अनुपालन नहीं करने वाले पायलटों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है। अकासा एयर को राहत प्रदान करने वाले एक अंतरिम फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि पायलटों के अनुपालन न करने के मामलों में कार्रवाई करने की डीजीसीए की क्षमता पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
अकासा एयर के याचिका दायर करने के बाद मामला अदालत के सामने आया है। हालांकि, विमानन नियामक डीजीसीए ने कहा था कि उसके पास पायलटों और एयरलाइंस के बीच रोजगार समझौतों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। अकासा एयर ने उन पायलटों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिन्होंने अनिवार्य अनुबंध संबंधी नोटिस अवधि पूरी किए बिना अपना पद छोड़ दिया था।
विमानन कंपनी के 40 से अधिक पायलटों के अनिवार्य नोटिस अवधि पूरी किए बगैर त्यागपत्र के कारण जुलाई और सितंबर के बीच उड़ानें बाधित हुईं, जिसके परिणामस्वरूप अंतिम समय में उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिससे यात्रियों को असुविधा हुई। अकासा एयर ने दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया था कि एयरलाइन के साथ अपने समझौतों के संबंध में प्रस्थान करने वाले पायलटों के गंभीर उल्लंघनों के कारण एयरलाइन का परिचालन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।