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खत्म हो वीआईपी कल्चर: अस्पतालों में बेड का पता लगाने के लिए बनाई जाए एक केंद्रीकृत और पारदर्शी प्रणाली, जनहित याचिका दायर

Tue, 11 May 2021 01:24 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

याचिका में बिस्तरों के आवंटन में वीआईपी कल्चर का आरोप लगाते हुए मरीजों को बेड का पता लगाने में मदद करने के लिए एक केंद्रीकृत और पारदर्शी प्रणाली बनाने की मांग की गई है।
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कोरोना मरीजों के लिए तैयार किए बेड - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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राजधानी के अस्पतालों में कोविड संक्रमित गरीब मरीजों की अपेक्षा अमीर लोगों को बेड प्रदान करने का आरोप लगाते हुए जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में बिस्तरों के आवंटन में वीआईपी कल्चर का आरोप लगाते हुए मरीजों को बेड का पता लगाने में मदद करने के लिए एक केंद्रीकृत और पारदर्शी प्रणाली बनाने की मांग की गई है। अदालत ने मामले में दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने दिल्ली सरकार को याचिका पर 21 मई तक अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। 

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अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर सहमति जताई कि पारदर्शिता होनी चाहिए और लोगों को पहले आओ पहले पाओ के आधार पर बेड मिलना चाहिए, लेकिन अस्पतालों में भारी भीड़ के कारण स्थिति खराब हो गई है।

हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में काम करने वाले दिल्ली निवासी मंजीत सिंह ने याचिका में कहा है कि हेल्थ इमरजेंसी की मौजूदा स्थिति में जहां बेड की मांग इसकी सप्लाई से ज्यादा है। वहीं शहर भर के अस्पतालों में कोविड-19 मरीजों को बेड का आवंटन मनमाना और अनुचित न हो, इसके लिए कोई ठोस व्यवस्था होनी चाहिए।
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याची की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक सूद ने अदालत को बताया कि लोग बेड के लिए अस्पतालों के बाहर भीड़ के रूप में एकत्रित नहीं हो सकते, इसलिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जहां प्रतीक्षा सूची में शामिल लोगों को यह सूचित किया जा सके कि कोई बिस्तर खाली हुआ है। ऐसा होने से सूची में उनकी बारी के अनुसार उसे बेड आवंटित किया जा सकता है।

अदालत की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने कहा कि हालांकि अस्पतालों में मौजूदा बिस्तरों की मौजूदा संख्या को केंद्रीकृत प्रणाली के तहत लाना व्यवहार्य नहीं हो सकता है, लेकिन जल्द ही आने वाले नए बिस्तरों को केंद्रीकृत प्रणाली के माध्यम से आवंटित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता मुंबई मॉडल की प्रतिकृति की मांग कर रहे है जहां अधिकांश बिस्तरों को सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया है और स्वयं इसे आवंटित कर रही है।

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