साल 2020 के विधानसभा चुनाव में पुरुषों के बराबर मतदान करने वाली दिल्ली की महिलाएं कोरोना टीकाकरण में पीछे दिखाई दे रही हैं। बीते 10 साल से बेटियों को लेकर बढ़ रहे अंतर का सामना कर रही राष्ट्रीय राजधानी में लिंगानुपात का असर टीकाकरण पर भी पड़ा है। अमर उजाला ने कोरोना टीकाकरण को लेकर जब लैंगिक समानता को लेकर पड़ताल की तो दो अहम बातें सामने आईं।
पहली यह कि हर रोज वैक्सीन लेने वाले 10 में से केवल चार महिलाएं हैं। वहीं दूसरी यह कि कोविन वेबसाइट पर 13 लाख से भी ज्यादा वैक्सीन लेने वालों की जानकारी उपलब्ध नहीं है। पड़ताल के दौरान यह भी पाया कि टीकाकरण को लेकर हालात उस लैंगिक असमानता से भी कम दर्शा रहे हैं जिन्हें लेकर बीते मार्च माह में केंद्र सरकार ने महिला एवं बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग को लिखे पत्र में कहा था।
इस पत्र में सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) 2016-2018 का हवाला देते हुए कहा था कि दिल्ली में लिंगानुपात 869 से घटकर 844 पर आ चुका है। वहीं कोरोना टीकाकरण में यह अंतर और घटकर 840 पहुंचा है। कोविन वेबसाइट के अनुसार दिल्ली में अब तक 56,68,086 लोगों को वैक्सीन दिया जा चुका है लेकिन वेबसाइट पर 43,81,529 लोगों की लैंगिक जानकारी ही उपलब्ध है। इसके अनुसार छह जून तक 18,38,636 महिला और 25,42,893 पुरुषों ने वैक्सीन ली है।
यानी 58 फीसदी पुरुष और 41.96 फीसदी महिलाओं ने वैक्सीन लिया है। इसे अगर गणितीय आधार पर देखें तो एक हजार पुरुषों पर 840 महिलाओं ने सुरक्षा कवच लिया है। यह लैंगिक असमानता 16 फीसदी है जोकि राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज 15 फीसदी से भी अधिक है। इसके पीछे कारणों का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग से भी संपर्क किया गया लेकिन खबर लिखे जाने तक जानकारी उपलब्ध कराई गई।
आंकड़े हों पूरे तो असमानता और भी अधिक
कोरोना महामारी में पिछले एक वर्ष से सरकार ने कभी भी जांच, संक्रमण, उपचार या फिर टीकाकरण को लेकर लैंगिक आधार पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। कोविन वेबसाइट पर भी 13 लाख लोगों की जानकारी नहीं है। अगर वर्तमान अनुपात को ही आधार माना जाए और कुल 56 लाख टीकाकरण की संख्या ली जाए तो टीकाकरण में लैंगिक असमानता 840 से भी घटकर 725 है जोकि देश में सबसे कम है। पंजाब में 754 और उत्तर प्रदेश में 769 है।
दिल्ली में महिलाओं की स्थिति. एक हजार पुरुषों पर 844 महिलाएं। एक लाख महिलाओं की आबादी पर 144 अपराध की शिकार।.एक लाख महिलाओं की आबादी पर 40.76 घरेलु हिंसा की शिकार।.यह हाल तब जब 11.43 फीसदी महिलाएं विधानसभा में सदस्य। 13.65 फीसदी ही महिलाएं भूमि, मकान या प्लॉट की स्वामी।.लैंगिक समानता पर दिल्ली का सूचकांक केवल 33। (नीति आयोग की एसडीजी 3.0 रिपोर्ट के अनुसार)
ऐसी असमानता की दिल्ली से उम्मीद नहीं
दिल्ली जैसे महानगर में टीकाकरण को लेकर लैंगिक असमानता की उम्मीद नहीं की जा सकती है। इसे दूर करने के लिए जिला और विधानसभा स्तर पर जागरुकता कार्यक्रम होने चाहिए।
- डॉ. विवेक, सामुदायिक चिकित्सा, एम्स.
महिलाओं का भी अधिकार बराबर का है। चूंकि बच्चों में भी संक्रमण का खतरा व्यस्कों की तुलना में बराबर है। ऐसे में महिलाओं को टीका सबसे पहले मिलना चाहिए क्योंकि वे घर और बच्चे भी संभालती हैं। तभी तीसरी लहर से सही बचाव भी होगा।
- डॉ. सुमेध, आरएमएल अस्पताल, नई दिल्ली.
दिल्ली में एक हजार की आबादी पर 188 महिलाएं निदेशक, विभागाध्यक्ष सहित अहम पदों पर जिम्मेदारी संभाल रही हैं। सरकार को इस असमानता को दूर करने पर जोर देना चाहिए।
- प्रो रिजो एम जॉन, स्वास्थ्य योजना विशेषज्ञ