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Biodiversity in Delhi : लैंटाना-कीकर की टूटेगी यारी, रिज से मिटेगी देसी पौधों की दूरी, चल रहा है छंटाई का काम

Thu, 09 Jun 2022 05:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा किशन कुमार, नई दिल्ली

सार

मध्य रिज पर लैंटाना को हटाने व कीकर की छंटाई के प्रोजेक्ट पर काम कर रही है सरकार। दिल्ली के 450 हेक्टेयर से लैंटाना हटाने व विलायती कीकर की घनी टहनियों को छांटने का काम किया जा रहा है। पहले फेज में करीब 25 हेक्टेयर जमीन से लैंटाना को हटा दिया गया है। साथ ही चेक डेम का भी निर्माण किया जा रहा है।
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लैंटाना... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी को आने वाले समय में नई जैव विविधता देखने को मिलेगी। इस कड़ी में मध्य रिज में आने वाले समय में तरह-तरह के पशु-पक्षी देखने को मिलेंगे। दिल्ली सरकार के वन विभाग ने योजना तैयार कर काम शुरू कर दिया है। दिल्ली के 450 हेक्टेयर से लैंटाना हटाने व विलायती कीकर की घनी टहनियों को छांटने का काम किया जा रहा है। पहले फेज में करीब 25 हेक्टेयर जमीन से लैंटाना को हटा दिया गया है। साथ ही चेक डेम का भी निर्माण किया जा रहा है।

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पश्चिमी मंडल के उप वन संरक्षक नवनीत श्रीवास्तव ने बताया कि मध्य रिज में विलायती कीकर व लैंटाना की संख्या अधिक है। पौधों की इन प्रजातियों की वजह से अन्य पेड़ों को नुकसान पहुंच रहा है व अन्य पेड़ों को बढ़ने का मौका नहीं मिल रहा है। इसको देखते हुए तीन साल की योजना के तहत यहां से विलायती कीकरों की घनी शाखाओं को छांटने के साथ लैंटाना को हटाया जाएगा। इनकी जगह पर स्थानीय पौधों को लगाया जाएगा, जिससे यहां जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा। इस कड़ी में अब तक 25 हेक्टेयर से लैंटाना को हटा दिया गया है।

कीकर से अधिक ऊंचाई वाले पौधे लगाएगा विभाग
अधिकारी ने बताया कि चूंकि, पेड़ संरक्षण अधिनियम के तहत पेड़ को काटा नहीं जा सकता है। ऐसे में कीकर से अधिक ऊंचाई वाले पौधों को लगाया जाएगा, जिससे देशी पौधों को धूप व पानी मिल सके। इससे भविष्य में देशी प्रजातियों की पेड़ के रूप में अधिक घने होंगे व देशी-विदेशी पशु- पक्षी यहां की ओर आकर्षित होंगे। इससे यहां आने वाले समय में जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा। इन पौधों में धौं, रौंज, अमलतास, ढाक, बड़, पिलखन, सिरस, स्टेरकुला व  देशी बबूल के पौधे शामिल हैं।
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1930 में अंग्रेजों ने लगाए थे कीकर
राजधानी में 1930 की शुरुआत में अंग्रेजों ने विलायती कीकर को लगाया था। इसका मुख्य उद्देश्य रिज को हरा भरा करना था, लेकिन रिज को हरा दिखाने के फेर में बाकी पेड़ों की प्रजातियों को बढ़ावा नहीं मिला। पेड़ की इस प्रजाति ने देशी बबूल, ढाक, कदंब, अमलतास, जंगली गुलमोहर को नष्ट करना शुरू कर दिया था। जैव विविधता बिगड़ने के कारण जीव-जंतु जैसे तरह-तरह के पक्षी, तितलियां, तेंदुए, साही और गीदड़ गायब हो गए। उदाहरण के तौर पर इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि यमुना जैव विविधता पार्क में विलायती कीकर व लैंटाना नहीं है। जैव विविधता के कारण यहां 2016 में तेंदुआ देखा गया था। तेंदुए किसी भी जगह पर तभी रह सकते हैं जब उन्हें उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार व जल संसाधन के स्त्रोत मिल जाए। हालांकि, बाद में इस तेंदुए को  स्थानांतरित कर दिया गया था।

अरावली जैव विविधता पार्क में पहले से मौजूद है उदाहरण
अरावली जैव विविधता पार्क में पहले से ही कीकर को हटाने के साथ लैंटाना को हटाया गया है। इसके लिए पर्यावरणविद् प्रो. सीआर बाबू ने योजना को तैयार किया था। बाद में इस योजना को अमलीजामा पहनाकर जैव विविधता को विकसित किया गया था।

तेजी से फैलता है विलायती कीकर और लैंटाना
यमुना जैव विविधता पार्क के प्रभारी व वैज्ञानिक डॉ. फैयाज खुदसर कहते  हैं, विलायती कीकर शुष्क परिस्थितियों में भी तेजी से बढ़ता है और अपने आसपास अन्य पौधों को बढ़ने नहीं देता। क्योंकि, इसमें से तरल पदार्थ निकलता है, ऐसे में यह अन्य पौधों को नुकसान पहुंचाता है। वहीं, यह पेड़ जिस इलाके में होता है वहां का भूजल काफी नीचे चला जाता है। साथ ही यह अन्य देशी पेड़ों के मुकाबले छाया भी ठीक तरह से नहीं देता है। वहीं, लैंटाना मिट्टी की उर्वरक क्षमता को घटाता है, जिससे मिट्टी में सूक्ष्मजीवों कम होते हैं। ऐसे में बाकी प्रजातियों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचता है।

मध्य रिज में ढाई किलोमीटर का पथ किया जाएगा तैयार : उप वन संरक्षक नवनीत श्रीवास्तव ने बताया कि जैव विविधता को विकसित करने के साथ यहां पर्यटन का भी ध्यान रखा जाएगा। इसके लिए यहां करीब ढाई किलोमीटर का पथ तैयार किया जाएगा। पथ तैयार होने के बाद यहां लोग सैर करेंगे।

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