दिल्ली दंगों की आंच थमती देख सामान्य लोग अब राहत की सांस ले रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी लोगों के जेहन में दंगों की दहशत बरकरार है। रात को कुछ अनहोनी न हो जाए, इसकी चिंता अभी भी उन्हें सता रही है। यही कारण है कि कॉलोनी के लोग रात के समय पारी-पारी में अपनी कॉलोनियों को बचाने के लिए पहरा दे रहे हैं।
खुरेंजी की श्रीराम कालोनी में हजारों की संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के मकान हैं। अनेक कालोनियां बनी हैं और सबके मुख्य निकास दिल्ली-यूपी जाने वाली रोड पर लिंक हैं। लेकिन किसी भी कालोनी में गेट नहीं बनाया गया है।
स्थानीय एहसान अहमद (40 वर्ष) ने बताया कि उनकी किसी भी कॉलोनी में गेट न होने से किसी के कभी भी घुस आने की आशंका बनी रहती है। इसीलिए सभी लोग चौकन्ने हैं और रात के समय जाग-जाग कर पहरे दे रहे हैं।
एहसान अहमद के मुताबिक उनकी चिंता केवल अपने को बचाने तक सीमित नहीं है। उनकी कालोनी में कुछ मकान हिंदुओं के भी हैं। अगर उन्हें यह चिंता है कि रात में बाहर से आकर कोई उपद्रवी हिंसा कर देता है, तो पूरी कॉलोनी बदनाम हो जाएगी। ऐसे में वे न सिर्फ अपने घरों की सुरक्षा कर रहे हैं, बल्कि वे दूसरे समुदाय के लोगों को भी बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
दूसरे समुदाय के लोगों के घर जा-जाकर उनके खाने-पीने की व्यवस्था चेक कर रहे हैं। इसके लिए अमन कमेटियों की भी मदद ली जा रही है, जिसमें उनके भाई एक सक्रिय सदस्य हैं। इन लोगों ने दंगों से पीड़ित समाज के बीच एक आदर्श प्रस्तुत किया है।
दिल्ली पुलिस संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों से नजर रख रही है। किसी मकान के ऊपर पत्थर-ईंटें रखे होने की आशंका को टाला जा सके, इसके लिए समय-समय पर ड्रोन कैमरों से रिकॉर्डिंग कराई जा रही है। स्थानीय लोगों में कुछ इसे शंका की नजर से देख रहे हैं, लेकिन कुछ लोग सुरक्षा के लिए इसे जरूरी समझ इसमें सहयोग भी कर रहे हैं।