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डीयू के तहखाने में शहीद स्मृति पुस्तकालय और अनुसंधान केंद्र खोलने की तैयारी

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नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक वाइस रीगल लॉज के तहखाने में बनी शहीद-ए-आजम शहीद भगत सिंह की कोठरी में अब शहीद स्मृति पुस्तकालय व अनुसंधान केंद्र खोला जाएगा। इस कोठरी में भगत सिंह को फांसी देने से पहले रखा गया था। पुस्तकालय व अनुसंधान केंद्र खुलने से इस क्षेत्र में शोध करने वाले विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।
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विश्वविद्यालय प्रशासन क्रांतिकारियों से जुड़ी पुस्तकों को यहां उपलब्ध कराएगा। वहीं भगत सिंह से छात्रों व फैकल्टी को परिचित कराने के लिए इस कोठरी को प्रत्येक शनिवार को खोला जाएगा।
देश की आजादी में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के योगदान को याद करते हुए शहीद दिवस के अवसर पर डीयू में आयोजित एक कार्यक्रम में यह घोषणाएं की गईं। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश निशंक पोखरियाल एक वीडियो संदेश के माध्यम से कार्यक्रम में जुड़े। उन्होंने आजादी में शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव के योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
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उन्होंने कहा कि एक दिन के लिए शहीद भगत सिंह को इस तहखाने में रखा गया था। उन्होंने डीयू के तहखाने में बनी कोठरी में पुस्तकालय बनाने और अनुसंधान केंद्र की योजना को भी सराहा। उन्होंने कहा कि 1922 में डीयू की नींव रखी गई थी और शुरुआत में केवल तीन कॉलेज 1881 में स्थापित सेंट स्टीफंस, 1899 में स्थापित हिन्दू कॉलेज और 1917 में स्थापित रामजस कॉलेज इससे संबद्ध थे।
उन्होंने कहा कि लगभग 750 छात्रों के साथ शुरू होकर दिल्ली विश्वविद्यालय आज 16 संकायों, 80 से अधिक शैक्षणिक विभागों, 90 महाविद्यालयों और सात लाख से अधिक छात्रों के साथ भारत के सबसे बड़े विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ है। अंत में उन्होंने प्रसिद्ध कवि हरीश चमोली की भगत सिंह पर लिखी गई कविता को सुनाते हुए अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
कम ही लोगों को पता है कि फांसी देने से पहले डीयू स्थित वाइस रीगल लॉज के तहखाने में बनी एक कोठरी में शहीद भगत सिंह को रखा गया था। मौजूदा समय में तहखाने के ऊपर कुलपति कार्यालय है।
डीयू कुलपति प्रो पीसी जोशी ने कार्यक्रम में शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भगत सिंह की स्मृति में यह कोठरी संरक्षित है। यहां एक सुराही, लालटेन, शहीदों के चित्र और खाट को रखा गया है। उन्होंने कहा कि डीयू की योजना है कि इस कोठरी को विद्यार्थियों के लिए खोला जाएगा। जिससे वह शहीदों को जान सकें। इस कार्यक्रम में डीन ऑफ कॉलेज डॉ बलिराम पाणि, साउथ कैंपस निदेशक सुमन कुंडु, रजिस्ट्रार विकास गुप्ता, समेत कई कॉलेज प्रिंसिपल उपस्थित थे।
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