दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2021-22 में स्नातक, स्नातकोत्तर, एमफिल-पीएचडी पाठ्यक्रमों में दाखिले केलिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। अक्तूबर से दाखिला प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। उस दौरान यदि कोई विद्यार्थी दाखिला रद या माइग्रेशन कराता है तो उसकी पूरी फीस रिफंड होगी। हालांकि इसके लिए 31 अक्तूबर तक की समय सीमा तय की गई है। कोविड-19 महामारी के कारण स्पेशल केस के रुप में यह सुविधा इस वर्ष की दाखिला प्रक्रिया केलिए दी जाएगी। इससे विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी।
कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन और संबंधित कारकों केकारण अभिभावकों को कई वित्तीय कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। इन सभी कारणों को देखते हुए पूरी फीस वापस की जाएगी। यदि कोई विद्यार्थी दाखिला 31 अक्तूबर तक दाखिला रद कराता है या माइग्रेशन कराता है तो सभी शुल्क समेत उन्हें फीस वापस की जाएगी। किसी प्रकार का शुल्क नहीं काटा जाएगा। इसकेबाद 31 दिसंबर तक दाखिला रद करने या वापस लेने पर फीस में से केवल एक हजार रुपये से अधिक राशि नहीं काटी जाएगी और शेष फीस वापस की जाएगी। इसमें किसी प्रकार का शुल्क नहीं काटा जाएगा। कोविड-19 महामारी के कारण यह व्यवस्था स्पेशल केस केरुप में इस वर्ष के लिए ही की गई है।
डीयू में दूसरी कट ऑफ केबाद कॉलेज बदलने का सिलसिला शुरू होता है। यह अंतिम कट ऑफ तक जारी रहता है। इस दौरान विद्यार्थी एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में शिफ्ट होते रहते हैं। यदि विद्यार्थी 31 अक्तूबर तक दाखिला रद या माइग्रेशन करता है तो उसकी पूरी फीस लौटाई जाएगी। लेकिन बाद में कुछ हिस्सा काट कर वापस की जाएगी।
देश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को डिग्री और प्रमाणपत्रों के सत्यापन से जुड़े अनुरोधों का समयबद्ध तरीके से निपटारा करना होगा। छात्रों की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी राज्यों और विश्वविद्यालयों को पत्र लिखा है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव प्रो. रजनीश जैन की ओर से विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और कॉलेजों के प्रिंसिपल को इस संबंध में पत्र लिखा गया है। दरअसल छात्रों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को इस संबंध में शिकायत भेजी थी। उन्होंने अपनी शिकायत में लिखा था कि विश्वविद्यालय और कॉलेज डिग्री और प्रमाणपत्रों के सत्यापन में देरी करते हैं।
इसके चलते आयोग ने विश्वविद्यालयों से छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए डिग्री एवं प्रमाणपत्रों के सत्यापन से जुड़े अनुरोधों का समयबद्ध तरीके से निपटारा करने का निर्देश दिया है। यूजीसी सचिव ने कुलपतियों को लिखे पत्र में कहा, यूजीसी को विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा दिये गए डिग्रियों व प्रमाणपत्रों की प्रमाणिकता के सत्यापन को लेकर बड़ी संख्या में अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं ।
जैन ने स्पष्ट किया कि यूजीसी समय समय पर छात्रों को सूचित कर रहा है कि वह डिग्रियों व प्रमाणपत्रों का सत्यापन नहीं करता है। जबकि डिग्रियों व प्रमाणपत्रों का सत्यापन संबंधित विश्वविद्यालयों को करना होता है। उन्होंने कहा, इसलिये विश्वविद्यालयों से आग्रह किया जाता है कि कृपया छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाणपत्रों के बारे में अनुरोध या अन्य स्पष्टीकरण का समयबद्ध तरीके से निपटारा करें ।
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के कारण वहां की स्तिथि काफ़ी ख़राब है। ऐसे में डीयू में पढ़ने वाले अफगानिस्तानी छात्र अपने वतन लौटने, वीजा और पढाई को लेकर चिंतित है। छात्रो की इस चिंता को दूर करने के लिए डीयू प्रशासन ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। डीयू कुलपति प्रो पीसी जोशी और उनकी टीम ने यहाँ रह रहे अफगानिस्तानी छात्रो से मुलाकात कर उन्हें हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।
बृहस्पतिवार को कुलपति प्रो पीसी जोशी, डीन ऑफ़ कॉलेज प्रो बलिराम पाणि, रजिस्ट्रार प्रो विकास गुप्ता, साउथ कैंपस निदेशक प्रो सुमन कुंडु, डीन छात्र कल्याण प्रो राजीव गुप्ता और विदेशी छात्र डिप्टी डीन प्रो अमर्जीव लोचन ने अफगानिस्तान के छात्रों से मुलाकात की। टीम ने छात्रों की समस्याओं को सुना और समझ कर उन्हें मदद का भरोसा दिया।
छात्रों ने वीजा विस्तार, आईसीसीआर स्कालरशिप, छात्रावास, आवास, और वित्तीय परेशानी की समस्या बताई। इस पर उन्हें भरोसा दिलाया गया कि विश्विद्यालय उनके साथ खड़ा है और उन्हें परेशानी नही होने दी जायेगी। छात्रों ने अफगानिस्तान के हालातों को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। अधिकतर छात्र अपने वीजा की अवधि खत्म होने को लेकर चिंतित है। वही पीजी कर रहे छात्र चाहते हैँ कि यहाँ रह कर उनकी जॉब का कुछ हल निकल जाये।