दिल्ली विश्वविद्यालय के तीन कॉलेज में प्रिसिपल की नियुक्ति पर दिल्ली सरकार और उससे वित्त पोषित कॉलेजों में एक बार फिर टकराव के हालात बन गए हैं। तीन कॉलेज में प्रिंसपल की नियुक्ति के लिए पिछले सप्ताह निकाले गए विज्ञापन पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार ने आदेश दिया है कि निकाय गठन से पहले वित्त पोषित कॉलेज कोई नई नियुक्ति नहीं कर सकते। इसकी सूचना दिल्ली सरकार के वित्त पोषित 28 कॉलेज को भेज दी गई है। इसमें कहा गया है कि आंशिक या पूर्ण वित्त पोषित कॉलेज शासी निकाय के गठन न करने तक कोई नियुक्ति नहीं करेगा।
इससे पहले बीते सप्ताह सत्यवती कॉलेज (सांध्य), भारती कॉलेज और दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज ने प्रिंसिपल की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसके एक दिन पहले कॉलेजों के प्रिंसिपल की ओर से एक बैठक की गई थी। अब उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से आदेश दिया गया है कि बिना शासी निकाय के गठन तक कॉलेज स्थायी नियुक्त नहीं करेंगे। सरकार की ओर से जिन 28 कॉलेजों को आदेश जारी किया गया है। इसमें से 12 कॉलेज दिल्ली सरकार से पूर्ण रूप से वित्त पोषित हैं।
शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज की प्रिंसिपल पूनम वर्मा के मुताबिक, कॉलेज की ओर से निदेशालय को सूचित किया जाएगा कि कॉलेज 22 नवंबर से शुरू होने वाले प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए नए सत्र के लिए अंतरिम व्यवस्था के रूप में अतिथि नियुक्तियां करेगा। इस बीच एक फेसबुक पोस्ट में डूटा अध्यक्ष एके भागी ने कहा कि आप सरकार द्वारा यह पत्र कई कॉलेजों में फिर से शामिल होने वाले तदर्थ शिक्षक के लिए मुसीबत हो सकता है। डूटा इसके लिए लड़ेगा भी और जीतेगा भी।
इंदिरा गांधी शारीरिक शिक्षा और खेल विज्ञान संस्थान, शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज, शहीद राज गुरु कॉलेज, दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज, डॉ भीम राव अंबेडकर कॉलेज, आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज और भगिनी निवेदिता कॉलेज कुछ डीयू कॉलेज हैं जो दिल्ली सरकार से पूरी तरह से वित्त पोषित हैं। वहीं, शिवाजी कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज, लक्ष्मी बाई कॉलेज, शहीद भगत सिंह कॉलेज, मैत्रेयी कॉलेज, एसपीएम कॉलेज फॉर वीमेन, सत्यवती कॉलेज, विवेकानंद कॉलेज, राजधानी कॉलेज, कमला नेहरू कॉलेज व गार्गी कॉलेज सरकार द्वारा आंशिक रूप से वित्त पोषित हैं।
टीचर फोरम ने जताया विरोध
दिल्ली यूनिवर्सिटी एससी, एसटी, ओबीसी टीचर्स फोरम और फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कुलपति प्रोफेसर योगेश कुमार सिंह को पत्र लिखा है। पत्र में तीन कॉलेजों में शासी निकाय के बिना प्रिंसिपल पद पर विज्ञापन निकालने पर आपत्ति जताई गई है। फोरम की ओर से डॉ. हंसराज सुमन ने कहा कि उच्च शिक्षा निदेशालय के निर्देश के बाद भी सरकार से संबद्ध तीन कॉलेजों ने शासीय निकाय के बिना ही स्थायी प्रिंसिपल के पदों का विज्ञापन निकाला है। इस विज्ञापन को निकालते हुए कॉलेजों ने विश्वविद्यालय के नियमों के साथ ही केंद्र सरकार की आरक्षण नियमों की भी अवहेलना की है। टीचर्स फोरम ने निकाले गए प्रिंसिपल पदों के विज्ञापनों को तुरंत रद्द करने की मांग करते हुए संसदीय समिति के निर्देशों का पालन करते हुए आरक्षण के प्रावधानों के तहत पुन: विज्ञापन निकालने की मांग की है ।