निगम चुनाव के नतीजे आने के करीब डेढ़ महीने बाद भी मेयर, डिप्टी मेयर का चुनाव नहीं हो पाया है। सदन की पहली बैठक में ही मेयर, डिप्टी मेयर के चुनाव के साथ वार्ड समितियों के 18 में से 6 सदस्यों का चुनाव भी होता है। शेष 12 सदस्यों का चुनाव वार्ड समितियों के भीतर ही होता है।
दिल्ली में अगर 24 जनवरी को सदन की बैठक में हंगामे के कारण मेयर का चुनाव नहीं हुआ तो संभावना है कि फिर अप्रैल में ही दिल्ली को नया मेयर मिल पाएगा। मेयर का चुनाव होने के बाद निगम की जोन समितियों का चुनाव होता है। इन सब में करीब महीने भर का समय लगता है। इसके बाद मेयर और पार्षदों के माध्यम से निगम सुचारु रूप से काम करना प्रारंभ करता है।
विज्ञापन
निगम चुनाव के नतीजे आने के करीब डेढ़ महीने बाद भी मेयर, डिप्टी मेयर का चुनाव नहीं हो पाया है। सदन की पहली बैठक में ही मेयर, डिप्टी मेयर के चुनाव के साथ वार्ड समितियों के 18 में से 6 सदस्यों का चुनाव भी होता है। शेष 12 सदस्यों का चुनाव वार्ड समितियों के भीतर ही होता है, जिसमें करीब महीने भर का समय लगता है। निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि 24 जनवरी को मेयर, डिप्टी मेयर और 6 सदस्यों का चुनाव नहीं हुआ तो फिर वार्ड समितियों का चुनाव भी नहीं हो पाएगा। फिर फरवरी में 28 दिन और केवल मार्च ही शेष बचेगा।
इस बीच बेहद कम समय में मेयर के चुनाव के साथ ही वार्ड समितियों का चुनाव कैसे हो पाएगा। यदि चुनाव हो भी गया तो इसका कोई खास फायदा दिल्ली की जनता को नहीं मिलेगा। क्योंकि नए मेयर के पास काम करने का समय ही नहीं होगा। अप्रैल में ही फिर से नए मेयर का चुनाव होना तय है।