हाईकोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों को आधारहीन निशाना बनाने से जनहित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अदालत ने 21 वर्षीय महिला मरीज की मौत के बाद मेडिकल रजिस्टर से एक रेडियोलॉजिस्ट का नाम अस्थायी रूप से हटाने के निर्णय को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।
न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने इस बात पर जोर दिया कि गंभीर लापरवाही से सख्ती से निपटा जाना चाहिए, क्योंकि हिलते हुए हाथ से स्केलपेल को नहीं चलाया जा सकता है। भारतीय मेडिकल रजिस्टर से एक डॉक्टर का नाम काटने से न केवल उसके कॅरिअर की मृत्यु हो जाती है, बल्कि यह भी इसके व्यापक पारिवारिक और सामाजिक प्रभाव हैं।
अदालत ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के आदेश के खिलाफ रेडियोलॉजिस्ट की याचिका पर सुनवाई करते हुए तीन महीने के लिए उनका नाम हटाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि काउंसिल ने उनके खिलाफ चिकित्सा लापरवाही के आरोप को हटा दिया है और उन पर किसी अन्य आरोप नहीं लगाया गया है।
अभिलेखों में हेराफेरी के मामले में सजा को कानून में बरकरार नहीं रखा जा सकता है। हालांकि यह सच है कि ऐसा आचरण जो न्यूनतम चिकित्सा मानक से भी कम हो या किसी मरीज के कल्याण के प्रति गंभीर लापरवाही प्रदर्शित करता हो, उससे गंभीरता से निपटा जाना चाहिए।
अदालत ने कहा यह भी उतना ही सच है कि कांपते हाथ से छुरी नहीं चलाई जा सकती। अदालत ने 3 जुलाई में पारित एक आदेश में कहा नतीजों से बेपरवाह डॉक्टरों को आधारहीन निशाना बनाना अंततः सार्वजनिक हित पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है।