इंस्पेक्टर जयप्रकाश की देखरेख में एसआई सम्राद खाटियान व हवलदार सुधीर की टीम ने 28 फरवरी को रेवाड़ी में दबिश देकर आरोपी गांव पिठानवास, रेवाड़ी हरियाणा निवासी सुरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। आर्थिक अपराध शाखा के केस में कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित किया हुआ था। आरोपी ने एसबीआई बैंक के अलावा जेएण्डके बैंक और सिंडीकेट बैंक से करोड़ों रुपये का लोन लेकर उनके साथ ठगी की है।
सुरेंद्र यादव ने पत्नी अनीता यादव के साथ वित्तीय सहायता के लिए वर्ष 2010 में एसबीआई बैंक, चांदनी चौक शाखा में अपने व्यवसाय (विद्युत उपकरण) को सुचारू रूप से चलाने के लिए लोने के लिए आवेदन किया था। आरोपी ने खुद को एक कंपनी प्रगति एसोसिएट्स का मालिक बताया। बैंक ने उसे 24 करोड़ रुपये का लोन दे दिया। मगर बाद में आरोपी ने बैंक का लोन नहीं चुकाया।
जब एसबीआई बैंक ने आरोपी सुरेंद्र और उसकी पत्नी अनीता द्वारा जमा किए गए संपत्ति दस्तावेजों की जांच की, तो यह पता चला कि उनके द्वारा जमा किए गए गिरवी रखी गई संपत्ति के दस्तावेज पहले से ही सिंडिकेट बैंक और जेएंडके बैंक के पास गिरवी रखे हुए थे। इनमें से एक प्रॉपर्टी के कागजात विवादित हैं। एसबीआई बैंक मैनेजर की शिकायत पर आर्थिक अपराध शाखा में वर्ष 2016 में जालसाजी का मामला दर्ज किया गया था।
किया हुआ है इंजीनियरिंग-एमबीए
सुरेंद्र ने मेकेनिकल इंजीनियर करने के अलावा एमबीए किया हुआ है। पढ़ाई के बाद इसने कुछ समय प्राइवेट नौकरी की और उसके बाद प्रॉपर्टी डिलिंग व कंस्ट्रक्शन कार्य किया। इसकी अनीता से वर्ष 1994 में शादी हुई थी। वह हमेशा अपना व्यवसाय शुरू करना चाहता था। वर्ष 2004 में उन्होंने अपनी फर्म मेसर्स प्रगति एसोसिएट्स के लिए चीन से बिजली के सामान आयात करना शुरू कर दिया। शुरू में कारोबार अच्छा चल रहा था और कारोबार के विस्तार के लिए उन्होंने अपनी संपत्ति गिरवी रखकर सिंडिकेट बैंक से कर्ज लिया।
बाद में उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक से संपर्क किया, क्योंकि बैंक ने अधिक ऋण सुविधाओं की पेशकश की। उन्होंने उसी के लिए अपने मित्र की संपत्ति को भी गिरवी रख दिया। इसने एसबीआई से अपनी संपत्ति के दस्तावेज जारी करवाए और धोखे से उसे जेएंडके बैंक के पास गिरवी रख दिया। 2014-2015 में, उसे व्यापार में भारी नुकसान हुआ और वे बैंकों और अन्य व्यक्तियों से लिए गए ऋण को चुका नहीं पाए। उन्होंने और उनकी पत्नी ने बैंकों से बचना शुरू कर दिया और जब बैंकों ने अपने ऋण की वसूली के लिए गिरवी रखी संपत्ति का निपटान करने का फैसला किया, तो की गई धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। इसके बाद इनके खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा में मामला दर्ज किया गया।