वीके सक्सेना, उपराज्यपाल दिल्ली।
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दिल्ली सरकार के सहायता प्राप्त स्कूल में फर्जी दस्तावेज की मदद से नियुक्ति पाने वाले सात टीजीटी और पीजीटी शिक्षकों को उपराज्यपाल ने बर्खास्त कर दिया है। साथ ही उनकी नियुक्ति की सीबीआई जांच की सिफारिश को मंजूरी दे दी है। इस संबंध में सतर्कता निदेशालय (डीओवी) ने प्रस्ताव एलजी को भेजा था। सतर्कता निदेशालय की जांच में शिक्षा निदेशालय और दिल्ली तमिल एजुकेशन एसोसिएशन (डीटीईए) के अधिकारियों की मिलीभगत से शिक्षकों की नियुक्ति की बात सामने आई थी।
वर्ष 2022 में 51 उम्मीदवारों को विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया। इसमें टीजीटी और पीजीटी पदों के लिए सातों को चयनित किया गया था। इन्होंने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जमा किए। शिक्षा विभाग के नियमों और शर्तों के अनुसार, स्कूल प्रबंधन को चयनित उम्मीदवारों के सभी प्रमाणपत्रों को सत्यापित करना आवश्यक था। मामले में प्रबंधन ने लापरवाही बरतते हुए इन उम्मीदवारों के अनुभव प्रमाणपत्रों को ठीक से सत्यापित नहीं किया।
शुरुआती जांच में तीन अभ्यर्थियों के अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। वहीं शेष चार उम्मीदवार के अनुभव प्रमाण पत्र संबंधित स्कूलों से सत्यापित किए गए थे, लेकिन चारों दस्तावेजी साक्ष्य नहीं दे पाए। जांच के बाद मुख्य सचिव ने जाली दस्तावेज के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले कर्मचारियों को बर्खास्त करने का प्रस्ताव दिया। डीओवी ने मामले में आपराधिक मामला दर्ज करने के अनुरोध के साथ सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई।
भर्ती प्रक्रिया के लिए एलजी ने गठित की समिति
उपराज्यपाल ने विभाग को भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचने के लिए सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में भर्ती प्रक्रिया का अध्ययन करने का आदेश दिया है। साथ ही भर्ती की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के उपाय सुझाने के लिए एक समिति गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (जीएडी) की अध्यक्षता वाली समिति में विशेष सचिव (वित्त) और सचिव (शिक्षा) सदस्य होंगे जबकि निदेशक (शिक्षा) समिति के संयोजक होंगे।