बृहस्पतिवार को कुछ इस तरह राष्ट्रपति भवन स्मॉग की चादर में लिपटा रहा।
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नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर की सुबह बृहस्पतिवार को प्रदूषण की घनी चादर से लिपटी रही। वातावरण में फैले प्रदूषकों से सूरज की किरणें धरती तक नहीं पहुंच सकी। खराब स्तर की हवा शाम होते-होते बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई। शाम छह बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 306 दर्ज किया गया। इस सीजन में अब तक दूसरी बार गुणवत्ता बेहद खराब हुई है। इससे बाहर निकले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉर कास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) का पूर्वानुमान है कि अगले दो दिनों में हवा की गुणवत्ता का स्तर बेहद खराब रहेगा। इसके बाद हवा की चाल बढ़ने से इसमें सुधार आ सकता है।
सफर का आकलन है कि बृहस्पतिवार सुबह दिल्ली की हवा की गुणवत्ता खराब स्तर में रही। बुधवार की तुलना में प्रदूषण में बढ़ोतरी नहीं दिख रही थी। दिन चढ़ने के साथ सतह पर चलने वाली हवाओं की चाल थम गई। इससे प्रदूषक दिल्ली के आबोहवा में घुल गए। दूर-दूर तक फैलना उनका संभव नहीं हो सका। इससे धीरे-धीरे हवा की गुणवत्ता खराब होती गई। सुबह 11 बजे एक्यूआई 250 के स्तर से बढ़कर दो बजे तक 280 पर पहुंच गया। शाम 4 बजे का 24 घंटों का सूचकांक 296 हो गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ जारी आंकड़ों के मुताबिक, हवा की खराबी इसके बाद भी जारी रही। शाम छह बजे तक गुणवत्ता खराब से बेहद खराब स्तर में चली गई। एक्यूआई 306 दर्ज किया। वैज्ञानिकों का मानना है कि मौसमी दशाओं की वजह से अभी प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। 23 व 24 अक्तूबर को दिल्ली की हवा बेहद खराब स्तर में बनी रहने का अंदेशा है।
24 घंटे में पराली का हिस्सा छह फीसदी कम
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बावजूद पराली के धुएं का हिस्सा कम रहा। बुधवार के 15 फीसदी की तुलना में बृहस्पतिवार को नौ फीसदी पराली के धुएं से हवा खराब हुई। सफर के मुताबिक, बुधवार को पंजाब, हरियाणा व पड़ोसी इलाकों में पराली जलाने के 1428 मामले रिकार्ड किए गए थे, लेकिन ऊपरी सतह में चलने वाली हवाओं की दिशा दिल्ली की तरफ न होने से धुआं दूसरी तरफ फैल गया। बुधवार को पराली जलाने के 500 से कम मामले दर्ज होने के बावजूद यह 15 फीसदी था। हवा की गुणवत्ता भी तुलनात्मक रूप से बेहतर थी। बुधवार का सूचकांक 268 रिकार्ड किया गया था।