दबा नहीं सकोगे मेरी आवाज जुल्म के साये में कत्ल के बाद भी मेरा लहू हर पन्ने पर गवाही लिख जाएगा...अंकित शर्मा की हत्या के दौरान उनके शरीर से निकले खून के कतरों की गवाही अदालती आदेश में दर्ज हो गई है। अंकित के शव को जिस नाले से बरामद किया गया, जिस जगह पर हत्यारी भीड़ इकट्ठा हुई।
प्लास्टिक सीट पर पड़े उनके खून के छींटों का डीएनए मिलान ने उनके कत्ल की वीभत्सता बयान की। अदालत ने अपने आदेश में रोहिणी फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट और डीएनए रिपोर्ट को अहम सबूत के तौर पर स्वीकार किया है।
दिल्ली दंगों के दौरान हुई आईबी अफसर अंकित शर्मा की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को आधार बनाते हुए न्याय प्रदान किया है। घटना के 2331 दिन बाद, पीड़ित परिवार को न्याय मिलने से संतोष है। अदालत के आदेश में अंकित के शरीर से मिले खून के कतरों और घटनास्थल से बरामद अन्य नमूनों की गवाही को महत्वपूर्ण माना गया है, जिसने हत्या की वीभत्सता को उजागर किया।
एफएसएल टीम ने नाले की दीवार से खून के नमूने, प्लास्टिक शीट और कागज के टुकड़े बरामद किए, जिनका मिलान अंकित के खून से किया गया। मोबाइल फोन से बरामद वीडियो और कॉल रिकॉर्डिंग ने हसीन उर्फ मुल्लाजी की भूमिका उजागर की।
उन्होंने फोन पर कबूला कि उन्होंने एक व्यक्ति को मारकर नाले में फेंका है। वॉइस सैंपल मैचिंग रिपोर्ट ने इसकी पुष्टि की। सीडीआर डेटा और सेल आईडी चार्ट से आरोपियों की लोकेशन चांद बाग पुलिया के पास साबित हुई। हथियार बरामदगी (चाकू) और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से घाव मैच किए गए। इन सबूतों ने पारंपरिक गवाहों की कमी को पूरा किया और अदालत को विश्वसनीय आधार प्रदान किया।
पुलिस ने जोड़ी कड़ी से कड़ी
घटना की जांच के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, डाटा फिल्टरेशन, मोबाइल सीडीआर के जरिये कड़ियों से कड़ियां जोड़ीं। दरअसल, पुलिस के लिए सबसे अहम चुनौती गवाहों की कमी और भयग्रस्त माहौल थी। कई गवाह सार्वजनिक बयान देने से कतरा रहे थे। पुलिस ने अंकित को भीड़ द्वारा घसीट कर ले जाने, शव को तीन व्यक्तियों के नाले में फेंकने समेत कई सीसीटीवी कोर्ट के समक्ष रखे। इन्हीं सबूतों के आधार पर अदालत ने बचाव पक्ष की कई आपत्तियों जिसमें देरी से एफआईआर और गवाहों की विश्वसनीयता को चुनौती देना शामिल था खारिज कर दिया।
ताहिर की बिल्डिंग से शुरू हुई जांच नाले पर खत्म
पुलिस ने फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) टीम के साथ मिलकर ताहिर हुसैन की बिल्डिंग (ई-7, खजूरी खास) और आसपास के इलाके की जांच की। बिल्डिंग की छत और तीसरी मंजिल पर पत्थर, ईंटें, पेट्रोल बम, एसिड बम और अन्य हथियार बरामद हुए। सड़क पर पत्थर, बोतलें और जले हुए सामान मिले। पुलिस ने फोटोग्राफ्स, वीडियो फुटेज और सीडीआर डेटा के आधार पर आरोपी पहचान की। एक महत्वपूर्ण वीडियो फुटेज मिला, जिसमें तीन व्यक्ति शव को चांद बाग नाले में फेंकते दिख रहे थे। इस वीडियो को एफएसएल में एनालाइज किया गया।
सात गवाह जो बने न्याय के सारथी
विकास कोचर
सबसे महत्वपूर्ण और सबसे विस्तृत गवाही देने वाले गवाह। बनी बेकरी के मालिक होने के नाते वे घटनास्थल के बहुत करीब थे। उन्होंने ताहिर हुसैन और अनस को अंकित शर्मा की हत्या में प्रत्यक्ष रूप से शामिल बताया। भीड़ के अंकित को घसीटकर मारने और शव को नाले में फेंकने की पूरी घटना का जीवंत वर्णन किया। ताहिर को भीड़ को उकसाते हुए कहते कि मारी मारो और हत्या में सक्रिय रूप से शामिल बताया। उनकी दुकान भी भीड़ ने जलाई थी। अदालत ने उनकी गवाही को विश्वसनीय माना। बचाव पक्ष ने कुछ विरोध किया, लेकिन फॉरेंसिक सबूतों और अन्य गवाहों ने इसे मजबूत किया।
प्रदीप वर्मा
वह मोंगा नगर, गली नंबर 6 के पास रहते थे। उन्होंने 25 फरवरी 2020 को शाम 5 बजे के आसपास भीड़ को अंकित शर्मा को घसीटते और मारते देखा। उन्होंने नाजिम और कासिम को अंकित को घसीटने में सक्रिय बताया। ताहिर हुसैन को भीड़ को उकसाते हुए देखा, हालांकि उन्होंने सीधे हत्या में ताहिर की सक्रिय भागीदारी नहीं बताई। उन्होंने भीड़ की हिंसा, पथराव और आगजनी का विस्तृत वर्णन किया। अदालत ने उन्हें प्राकृतिक गवाह माना, हालांकि बचाव पक्ष ने कुछ सुधारों पर सवाल उठाए।
आकाश
घटनास्थल के निकट मौजूद थे। उन्होंने भीड़ के अंकित शर्मा को पकड़कर मारने की पूरी घटना देखी और समीर खान को हत्या में शामिल बताया। ताहिर हुसैन को भीड़ को उकसाते और "मारो मारो" के नारे लगाते देखा। उन्होंने ताहिर की उपस्थिति और उकसावे को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने भीड़ की हिंसा, पथराव और आगजनी का विस्तृत ब्योरा दिया।
भरत उर्फ कालू
आकाश के भाई और घटनास्थल पर मौजूद। उन्होंने अंकित शर्मा पर हमला और हत्या देखी। नाजिम और कासिम को घसीटने में शामिल बताया। ताहिर हुसैन को भीड़ को भड़काते देखा, लेकिन हत्या के प्रत्यक्ष कृत्य में उनकी भूमिका सीमित बताई। उनकी गवाही आकाश की गवाही का सहायक साक्ष्य बनी।
हेड कांस्टेबल राहुल
पुलिसकर्मी, जो घटनास्थल पर ड्यूटी पर थे। उन्होंने हिंसक भीड़ का विस्तृत वर्णन किया। ताहिर हुसैन को भीड़ को उकसाते और सक्रिय रूप से शामिल देखा। उन्होंने ताहिर को मुख्य उकसाने वाले के रूप में पहचाना और भीड़ की साम्प्रदायिक हिंसा बढ़ाने में उनकी भूमिका बताई। उनकी गवाही ने पुलिस दृष्टिकोण को मजबूत किया।
हेड कांस्टेबल प्रवीण
पुलिसकर्मी और घटनास्थल पर मौजूद। उन्होंने भीड़ की हिंसा और ताहिर हुसैन की उपस्थिति का वर्णन किया। ताहिर को उकसाते और भीड़ का नेतृत्व करते देखा। गवाह हेड कांस्टेबल राहुल के साथ मिलकर उन्होंने पुलिस पक्ष को और मजबूत बनाया।
प्रियंका गौर
गली नंबर 6 के गेट के अंदर से घटना देखी। उन्होंने ताहिर हुसैन को उनके घर के पास भीड़ को उकसाते हुए देखा। भीड़ की आक्रामकता बढ़ाने में उनकी भूमिका बताई। ताहिर को मुख्य प्रेरक माना, हालांकि दूरी के कारण कुछ सीमाएं स्वीकार कीं। एक महिला गवाह के रूप में उनकी गवाही ने घटना का अतिरिक्त दृष्टिकोण प्रदान किया।
भयावह याद
- 30 लाशें
- 53 मौतें
- 700 से अधिक घायल
- इस दंगे में 53 लोगों की मौत हुई, दोनों समुदायों के लोग शामिल थे।
- 700 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें कई पुलिसकर्मी भी शामिल थे। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस अमित वर्मा गंभीर रूप से घायल हुए और आईसीयू में भर्ती रहे।
- सैकड़ों दुकानें, घर, वाहन, स्कूल और धार्मिक स्थल जलाए या क्षतिग्रस्त किए गए। भजनपुरा के मोहन नर्सिंग होम और पेट्रोल पंप पर भी हमले हुए।
यह था मामला
25 फरवरी 2020 को दिल्ली के चांद बाग पुलिया क्षेत्र में सीएए समर्थक और विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा भड़क उठी थी। इसी दौरान अंकित शर्मा, जो आईबी में तैनात थे, अपने घर से कुछ सामान लाने निकले थे। शाम तक जब वह घर नहीं लौटे तो उनके पिता रविंदर शर्मा ने 26 फरवरी को थाना दयालपुर में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। बाद में अंकित का शव चांद बाग नाले से बरामद हुआ है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर धारदार हथियारों से लगे 20 से अधिक घाव पाए गए। शव केवल अंडरवियर में था, जिससे स्पष्ट था कि हत्या के बाद शव को नाले में फेंका गया।
दंगों की शुरुआत 23 फरवरी 2020 को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास सीएए के खिलाफ महिलाओं के प्रदर्शन के दौरान हुई। विरोध करने वालों और समर्थकों के बीच तनाव बढ़ा, जिसके बाद पथराव शुरू हो गया। यह हिंसा अगले चार दिनों (23 से 26 फरवरी) तक जारी रही और उत्तर-पूर्व दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, चांदबाग, भजनपुरा, करावल नगर, शिव विहार, गोकुलपुरी और खजूरी खास जैसे इलाकों में फैल गई।
पुलिस ने इस मामले में 758 प्राथमिकी दर्ज की, 2600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया। जांच में वीडियो सबूत, गवाहों के बयान और एस आई टी की भूमिका महत्वपूर्ण रही। दंगे दिल्ली के एक जिले तक ही सीमित रहे, जिससे पूरे शहर में फैलने से बचा गया। हालांकि न्यायिक प्रक्रिया बेहद धीमी है। अब तक कुल 174 मामलों में ट्रायल कोर्ट सुनवाई पूरी कर पाया है। 200 से अधिक मामले ट्रायल की प्रक्रिया में हैं। 250 से अधिक मामलों में अभी तक आरोप पत्र भी दाखिल नहीं हो पाया है और जांच चल रही है।