दवा की पहचान के लिए नेत्रहीन या तो किसी से पूछकर या फिर खुद हाथों से टटोल अंदाजा लगाकर दवाई का पता लगाते हैं। इससे कई बार गलती होने की संभावना बढ़ जाती है। इसको देखते हुए डॉ. स्मृति ने दवाई की पट्टी पर विशिष्ट संकेतों वाले क्यूआर कोड के तहत दवा की मात्रा, दवा का नाम, दवा का जेनरिक नाम, बैच नंबर, उत्पादन तिथि, एक्सपायरी तिथि, दुष्परिणाम समेत अन्य जानकारियों को शामिल करने की मांग की थी। इसे लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, आयुष मंत्रालय व नीति आयोग से अपील की थी। साथ ही सोशल मीडिया पर भी अभियान चला था। अब उन्हें नीति आयोग से वीके पॉल की ओर से दवाई की पट्टी पर क्यूआर कोड डालने का आश्वासन दिया गया है।
डॉ. स्मृति सिंह के मुताबिक, उनके दो छोटे बच्चे हैं। उनके पति भी दृष्टिबाधित हैं और डीयू में शिक्षक हैं। कोरोना की दूसरी लहर में वह संक्रमण की चपेट में आ गई थीं। इस दौरान वह दवा को टटोलकर पहचान करने की कोशिश करती थी। इससे गलती की संभावना बढ़ जाती थी। वहीं, दवाईयों की एक्सपायरी तारीख के बारे में भी पता नहीं चल पाता था। ऐसे में उन्हें दवाई पर अंकित होने वाले क्यूआर कोड की जरूरत महसूस हुई, जिससे दवाई के बारे में सही जानकारी मिल सके। स्वस्थ होने पर उन्होंने इसे लेकर अभियान शुरू किया था।