अदालत ने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत को गुमराह करने पर दिल्ली पुलिस के एक उपनिरीक्षक को कड़ी फटकार लगाई। दरअसल जांच अधिकारी ने कहा कि पीसीआर पर तैनात पुलिसकर्मी किसी घटना का सही ब्योरा नहीं देते, बल्कि केवल शिकायत का सार प्रदान करते हैं।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश लोकेश कुमार शर्मा ने उप निरीक्षक रंजीव कुमार से कहा कि उसमें सिर्फ अदालत को न गुमराह किया है, बल्कि उसके खिलाफ अपना कर्तव्य निर्वहन न करने संबंधी आईपीसी की कई धाराओं के तरफ आरोप बनता है। उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की जा सकती है।
उप निरीक्षक ने जमानत मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि उसे पीसीआर वैन के तरफ से पूरी जानकारी नहीं मिली थी। उसे घटनास्थल पर सिर्फ झगड़े की बात कही गई थी। इसके बाद उसने जांच करने के बाद पीड़ित लड़की के पिता के बयान के आधार पर इस मामले में पास्को और अनुसूचित जाति जनजाति संबंधी कानून की धारा जोडी थी।
वहीं पीड़ित के पिता ने इस बात को खारिज करते हुए कहा कि उसने पीसीआर कॉल की थी, लेकिन कोई भी पुलिसकर्मी जांच करने नहीं आया था। अदालत के कड़े रवैये को देखते हुए सरकारी वकील ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि पीसीआर वैन की सभी बातों को रिकॉर्ड किया जाता है व उसे सुरक्षित भी रखा जाता है। ऐसे में उक्त रिकार्ड को चैक करवाने के बाद ही कार्रवाई की जाए।