हिंदी फिल्मों में आपने अमूमन देखा होगा कि अभिनेता बचपन में पेट भरने के लिए छोटी-छोटी चोरियां करता है। भूख से अपराध करने का शुरू हुआ सिलसिला ताउम्र उसका पीछा नहीं छोड़ता। बाद अपराध की दुनिया का बादशाह तक बन जाता है। हकीकत में भी कई बार इस तरह के हालात देखने को मिल जाते हैं। इसमें बेहद जरूरी चीजों को पूरा करने के लिए कोई नाबालिग या युवा अपराधिक दुनिया की तरफ कदम बढ़ा देता है। इस हालात से वाकिफ दिल्ली पुलिस ने अनूठा अभियान शुरू किया है। इसके तहत पहली बार अपराध करने वाले नाबालिगों व युवाओं को वापस मुख्य धारा में लाया जाना है।
अभियान के तहत युवाओं की काउंसलिंग करने के साथ उनको स्वावलंबी बनाने तक का दिल्ली पुलिस का प्रयास है। काउंसलिंग के दौरान पुलिस उनके परिवार वालों व रिश्तेदारों से यह जानने की कोशिश करेगी कि संबंधित व्यक्ति ने अपराध का रास्ता क्यों चुना। वह कौन सी वजहें थीं, जिसमें उसने पहली बार अपराध किया। साथ ही अपने स्तर पर पुलिस उसको मुख्य धारा में लाने का विकल्प भी तलाशेगी। पिछले हफ्ते शुरू हुए अभियान को अभी मॉडल के तौर पर दक्षिणी परिक्षेत्र के दिल्ली पुलिस के जिलों में शुरू किया गया है। इसमें हर दिन औसतन एक थाना पुलिस इस तरह के एक परिवार से मिलती है।
दक्षिण पूर्वी जिला के पुलिस उपायुक्त आरपी मीणा बताते हैं कि अपराध पर रोकथाम के लिए उसकी वजहें जानना भी जरूरी है। खासकर उन मामलों में, जहां किसी ने पहली बार अपराध किया हो। इसकी जानकारी के बिना उन्हें मुख्य धारा में लाना संभव नहीं है। दक्षिण परिक्षेत्र के संयुक्त आयुक्त शुभाशीष चौधरी ने इस दिशा में ठोस पहल की है। इसके तहत छोटे-छोटे अपराध करने वाले युवाओं के परिवार वालों व रिश्तेदारों को भरोसे में लेकर सुधार की कोशिश की जा रही है। जरूरी होने पर संबंधित व्यक्ति को प्रशिक्षण दिलवाकर आर्थिक तौर पर स्वावलंबी बनाया जा रहा है।
बुरी संगत और नशा की वजह से पहली बार अपराध करते हैं युवा
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एक सप्ताह पहले शुरू हुए इस अभियान में अभी आंकड़ा देना संभव नहीं होगा। फिर भी, परिवार वालों की काउंसलिंग में यह बात सामने आई है कि युवा नशे की लत और बुरी संगत की वजह से पहली बार अपराध करते हैं। परिवार से मिलने का मकसद अपराध में शामिल हुए बदमाशों के पारिवारिक स्थिति को जानना है।
पुलिस उपायुक्त भी होते हैं काउंसलिंग में शामिल
काउंसलिंग में पुलिस उपायुक्त स्तर के अधिकारी परिवार के काउंसलिंग में शामिल होते हैं। वह परिवार को हर एक बारीकी को समझाने का प्रयास करते हैं। जिस दिन ज्यादा संख्या में परिवार वालों के थाने आने की जानकारी होती है, उस दिन निजी संस्थाओं की मदद से काउंसलर को बुलाया जाता है। साथ ही पुलिस के अधिकारी मौजूद रहते हैं। इसमें थाना प्रभारी से लेकर पुलिस उपायुक्त, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त व सहायक पुलिस आयुक्त शामिल होते हैं।
इस तरह मुख्य धारा में लाने का पुलिस का तरीका
. ऐसे अपराधिकयों की पहचान, जिन्होंने हाल-फिलहाल में ही रखा अपराध की दुनिया में कदम।
. परिजनों को बुलाकर उनके साथ की जाती है बातचीत।
. पुलिस परिवार का जुटाती आंकड़ा।
. नशा करने वालों को भेजा जाता नशा मुक्ति केंद्र।
. गरीब परिवार के बच्चों को दिलाई जा रही उनकी दिलचस्पी के अनुसार ट्रेनिंग।
. इसके सहारे आर्थिक तौर पर स्वावलंबी बनाने की कोशिश।
. पढ़ा-लिखा होने पर नौकरी दिलाने में भी मददगार होगी पुलिस।