अदालत ने अधिवक्ता महमूद प्राचा के कार्यालय के लिए जारी सर्च वांरट को रद्द करने से इंकार कर दिया। अदालत ने पुलिस को तय कानून का पालन करते हुए सर्व वारंट को तामिल करने की इजाजत प्रदान कर दी।
पटियाला हाउस स्थित मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट डॉ. पंकज शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि याची प्राचा द्वारा उठाई गई आपत्तियां निराधार हैं। अदालत ने प्राचा द्वारा दिए उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि पुलिस द्वारा उनके कार्यालय में मारे गए छापे के आलोक में वकील-मुवक्किल विशेषाधिकार की रक्षा के लिए निर्देश दिया जाए। अदालत ने पुलिस को कहा कि वे तय कानून व सुरक्षा उपायों के तहत सर्व वारंट को तामिल कर सकते है।
अदालत ने विशेषज्ञ की राय का हवाला देते हुए कहा कि अन्य आंकड़ों के साथ किसी भी हस्तक्षेप के बिना पेनड्राइव/मेमोरी डिवाइस में मौजूद आंकड़ों को पुन: प्राप्त किया जा सकता है। ऐसे में याची के उस तर्क को नहीं माना जा सकता कि आंकड़ों से छेड़छाड़ की जा सकती है।
अदालत ने कहा कि यदि हार्ड डिस्क एफएसएल में पेश की जाती है तो मौजूदा डेटा में से लक्षित डेटा को जुड़े मेटा डेटा में किसी भी परिवर्तन के बिना प्राप्त किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि ऐसे में यह याची के अन्य मुवक्किलों से संबंधित हार्ड डिस्क में संग्रहित डेटा को प्रभावित नहीं करेगा।
अदालत ने कहा कि किसी भी मामले आरोपी को यह इजाजत नहीं दी जा सकती कि वह जांच अधिकारी को बताए कि कैसे जांच व साक्ष्य एकत्रित करने है। साक्ष्य एकत्रित करना उनका जांच एजेंसी का आंतरिक मामला है ऐसे में जांचकर्ता के हाथ साक्ष्य एकत्रित करने के लिए बांध नहीं सकते। अदालत जांच में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। इसके अलावा आरोपी को यह इजाजत नहीं दी जा सकती कि वह जांच अधिकारी को बताए कि कैसे जांच व साक्ष्य एकत्रित करने है।
पुलिस ने दिल्ली दंगो के एक मामले में फर्जी दस्तावेज दाखिल करने के मामले में प्राचा के कार्यालय में दो बार तलाशी ली है। इसी मामले में हार्ड डिस्क को जब्त करने के खिलाफ प्राचा ने आदेन दाखिल किया था।
पटियाला हाउस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके वाधवा ने भी हालही में सर्च वांरट पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि पुलिस को इस प्रकार वकीलों के कार्यालय में तलाशी की इजाजत नहीं दी जा सकती। ऐसे में वकीलों के चैंबरों में घुसने की इजाजत मिल जाएगी।