दिल्ली पुलिस ने दिल्ली छावनी इलाके में 9 वर्षीय बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में श्मशान के पुजारी और तीन अन्य के खिलाफ शनिवार को अदालत में आरोपपत्र दायर कर दिया। अपराध शाखा ने जांच मिलने के 23 दिनों में जांच पूरी कर आरोपपत्र दायर किया है।
ड्यूटी मजिस्ट्रेट मनु श्री के समक्ष दायर 400 पृष्ठों के आरोपपत्र में पुलिस ने दक्षिण-पश्चिम जिले के श्मशान घाट के 55 वर्षीय पुजारी राधेश्याम और उसके कर्मचारियों-कुलदीप सिंह, सलीम अहमद और लक्ष्मी नारायण को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस ने तर्क रखा कि विस्तृत जांच व गवाहों के बयानों के आधार पर इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 304, 376 (डी), 342, 506, 201 और 34 के तहत हत्या, गैर इरादतन हत्या, सामूहिक दुष्कर्म, गलत तरीके से हिरासत में रखने, सबूतों को नष्ट करने के आरोप में मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य है।
इन धाराओं के अलावा चारों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम की धारा छह और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कानून की धारा तीन के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। सभी आरोपी वर्तमान समय में न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत ने आरोपपत्र पर संज्ञान संबंधी सुनवाई 31 अगस्त तय की है।
एक अगस्त को बच्ची का श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया था। पुजारी ने कहा था कि बच्ची की करंट लगने से मौत हुई है और उसी दौरान उसका शव को जला दिया गया लेकिन लोगों द्वारा आग बुझाकर बच्ची के अवशेष बरामद कर लिए गए। मामले की जांच पहले स्थानीय पुलिस कर रही थी लेकिन पुलिस पर लापरवाही के आरोप के चलते मामले की जांच पांच अगस्त को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंप दी गई।
आरोपपत्र में उस विशेष जांच दल की एक रिपोर्ट भी शामिल की गई है जिसका गठन अपराध शाखा द्वारा त्वरित और प्रोफेशनल जांच के लिए किया गया था। पुलिस ने कहा जांच के दौरान, प्रासंगिक गवाहों की गवाही दर्ज करने के अलावा, वैज्ञानिक, तकनीकी और अन्य साक्ष्य एकत्र किए गए और उनका विश्लेषण किया गया।