बातचीत के दौरान जो उनके जाल में फंस जाते थे, उन्हें वह योजना का लाभ लेने से पहले बैंक खाते में रुपये जमा करने के लिए कहते थे। एक बार बैंक खाते में रुपये आ जाने के बाद वह कभी भी पीड़ित से बात नहीं करते थे। राहुल ने बताया कि उसके दो सहयोगी बृजेश और दिनेश उन्हें क्रेडिट कार्ड की जानकारी और मोबाइल नंबर मुहैया करवाते थे, जिसपर बात करके वह ठगी को अंजाम देते थे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इनके बैंक खातों के जरिए पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इनलोगों ने अब तक कितने लोगों से ठगी कर चुके हैं। साथ ही पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है।