दिल्ली के बालाजी एक्शन अस्पताल में 235 कोविड मरीजों का इलाज चल रहा था और कुछ ही देर में ऑक्सीजन खत्म होने वाला था। दिल्ली पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर ऑक्सीजन टैंकर को सही वक्त पर भेजा। जिससे 235 लोगों की जान बच गई।
कोरोना महामारी ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है। बढ़ते मामलों ने चारों तरफ कोहराम मचा दिया है। संक्रमित लोगों को इलाज कराने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बेड, ऑक्सीजन और दवाई की भारी किल्लत हो गई है।
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मरीजों को इलाज कराने के लिए न तो बेड मिल रहे हैं और ना ही ऑक्सीजन। ऐसा ही एक मामला दिल्ली के बालाजी एक्शन अस्पताल का है। अस्पताल में 235 कोविड मरीजों का इलाज चल रहा था और कुछ ही देर में ऑक्सीजन खत्म होने वाला था। लिक्विड गैस टैंक में ऑक्सीजन की मात्रा क्रिटिकल स्तर पर पहुंच गया था और 235 मरीजों की जान खतरे में पड़ गई थी।
दरअसल, कोविड प्रतिबंधों के चलते दो ऑक्सीजन टैंकर दिल्ली की सीमाओं पर अटक गए थे। लेकिन, दिल्ली पुलिस की सर्तकता और सूझबूझ ने सभी मरीजों की जान बचा ली। पुलिस ने ऑक्सीजन टैंकरों को पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया। जिससे सही समय पर टैंकर अस्पताल पहुंच गया और सभी मरीजों की जान बच गई।
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वहीं, इससे पहले राजधानी की दिल की पुलिस ने रविवार को कोरोना संक्रमित 35 मरीजों की जान बचाई थी। निहाल विहार स्थित मनसाराम अस्पताल में रविवार को अचानक ऑक्सीजन की कमी से कोरोना संक्रमित 35 मरीजों की जान पर बन आई थी। काफी प्रयास के बावजूद जब अस्पताल को ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पाई तो अस्पताल प्रशासन ने दिल्ली पुलिस से मदद मांगी थी।
पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद बवाना के एक ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क कर दस सिलेंडर का इंतजाम किया और बाद में दस और सिलेंडर को अस्पताल को सौंप दिया। अस्पताल के निदेशक ने कीमती जान बचाने के लिए दिल्ली पुलिस को धन्यवाद दिया था। बाहरी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त परविंदर सिंह ने बताया कि रविवार दोपहर करीब डेढ़ बजे नांगलोई-नजफगढ रोड स्थित मनसा राम अस्पताल के निदेशक डॉक्टर राजेश डबास ने दिल्ली पुलिस को फोन कर बताया था कि उनके अस्पताल में उपलब्ध ऑक्सीजन की कमी हो रही है। यह एक घंटे से ज्यादा नहीं चल सकती है। उनके अस्पताल में भर्ती 35 कोरोना संक्रमित मरीजों को ऑक्सीजन की सख्त आवश्यकता है।