उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा चौक पर शनिवार सुबह करीब 11 बजे वाहनों की भीड़ थी। मेट्रो का काम होने के कारण वाहन थोड़ा धीमा चल रहे थे। इस सबके बीच चौक पर चांद बाबा की मजार पर कुछ लोग फूल और धूप बत्ती बेचते नजर आए। दो महिलाएं मत्था टेकती भी दिखाई दी। मजार की तीनों दीवारों पर अब भी दंगे के निशान नजर आते हैं।
मजार की देखभाल करने वाली भूरी बताती हैं कि 25 फरवरी की दोपहर दंगाइयों की भीड़ मजार की ओर बढ़ रही थी। वह अपनी जान बचाने के लिए सड़क की दूसरी तरफ भाग गई, जहां से उन्होंने मजार को दंगाइयों की भेंट चढ़ते देखा। तोड़फोड़ करने के बाद भीड़ वहां से चली गई। बाबा में दोनों समुदायों के लोगों की आस्था है। दंगे के बाद भी इसमें ज्यादा बदलाव नहीं आया। इस वक्त भी दोनों समुदायों के लोग यहां मत्था टेकते हैं। हालांकि, अब तक मजार का जीर्णोद्घार नहीं हो सका है। इसके लिए धीरे-धीरे कार्य चल रहा है।
फिलहाल टाइल लगाई गई है।
स्कूल फिर से बन गया, अब बच्चों का इंतजार
वजीराबाद रोड से शिव विहार की ओर जाने वाले प्रमुख रास्ते पर बाबू नगर में डीआरपी कांवेंट स्कूल है। शनिवार दोपहर के करीब एक बजे स्कूल का मुख्य दरवाजा खुला था। अंदर प्रवेश करने पर दिल्ली पुलिस का एक जवान तैनात दिखा। वहां स्कूल के मैनेजर और व्यवस्थापक से मुलाकात हुई। व्यवस्थापक धर्मेश शर्मा ने बताया कि 24 फरवरी को स्कूल के गार्ड से उन्हें जानकारी मिली कि बराबर की एक इमारत से 100 से अधिक दंगाई उनके स्कूल में प्रवेश कर उपद्रव मचा रहे हैं। उन्होंने तुरंत गार्ड को वहां से निकलने के लिए कहा।
29 फरवरी को वह स्कूल में पहुंचे, जहां सभी कक्षाओं का सामान जला हुआ था। मुख्य गैलरी को भी पूरी तरह आग के हवाले कर दिया गया। पत्थरों से सभी शीशे तोड़ दिए गए। यह देखकर वह काफी विचलित हो गए थे। आसपास रहने वाले लोगों ने उनकी हिम्मत बढ़ाई और स्कूल को दोबारा संवारने के लिए उन्हें प्रेरित किया। करीब छह महीने तक चले काम के बाद वह स्कूल को नया रूप दे पाए। अब एक साल बाद स्कूल फिर से खुल रहा है। उन्हें उम्मीद है कि कुछ दिनों में बच्चे पहले की तरह यहां आकर पढ़ाई करेंगे।