हाल ही में स्विस कंपनी द्वारा जारी प्रदूषित राजधानियों की सूची में दिल्ली पहले स्थान पर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी में पीएम 2.5 का स्तर 84.1 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर मापा गया है। दिल्ली में इसके लिए दो दुश्मन जिम्मेदार हैं जो लगातर दिल्ली की हवा को प्रदूषित कर रहे हैं। इसमें वाहन से निकलने वाला जहरीला धुएं से उत्पन्न होने वाली सल्फर व नाइट्रोज डायोक्साइड गैस व कूड़ा जलने से उत्पन्न होने वाला धुआं प्रमुख है। साथ ही दिल्ली की भूगौलिक स्थिति भी इसके सबसे अधिक प्रदूषित होने के लिए जिम्मेदार है।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदूषित राजधानियों की सूची में दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर बांग्लादेश की राजधानी ढका (77.1), अफगानिस्तान की राजधानी काबुल (46.5) व कतर की राजधानी दोहा (44.3) से भी अधिक रहा है। हालांकि, राहत भरी बात यह है कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष दिल्ली के प्रदूषण में 15 फीसदी की कमी आई है।
प्रदूषण के लिए दो तत्व होते हैं जिम्मेदार
प्रदूषण के लिए दो तत्व जिम्मेदार होते हैं। इसमें पीएम 2.5 व पीएम 10 कण प्रमुख हैं। यह इतने महीन कण होते हैं कि मनुष्य का इनको देख पाना मुश्किल होता है। वहीं, पीएम 2.5 कण सबसे अधिक खतरनाक होता है। यह इतना खतरनाक होता है कि आसानी से सांस के द्वारा मनुष्य के फेफड़ों में पहुंच विभिन्न प्रकार की सांस संबंधी बीमारियों की जन्म देता है।
वाहन, गैस व ठोस कचरे को जलाने से निकलता है पीएम 2.5
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(सीपीसीबी) के पूर्व अपर निदेशक डॉ. सुशील कुमार त्यागी के मुताबिक, पीएम 2.5 का उत्सर्जन तेल व डीजल के जलने से भी होता है। तेल व कोयला जलने से हवा में सल्फर डायोक्साइड(एसओ2) उत्पन्न होता है। इसका प्रमुख कारण यह भी है कि दिल्ली में निजी वाहनों की संख्या अधिक होना व इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या कम होना। वहीं, जीवाशम ईंधन जैसे गौसोलीन जलने से नाट्रोजन डायोक्साइड(एनओ2) उत्पन्न होता है। दूसरी ओर, पत्ते, कचरा, प्लास्टिक व पराली जलाने से भी पीएम 2.5 उत्पन्न होता है। इसके अलावा सड़कों पर उड़ने वाली धूल भी इसके कारकों में शामिल हैं।
भोगौलिक कारण भी है प्रमुख
दिल्ली में प्रदूषण के लिए भोगौलिक कारण भी जिम्मेदार है। सीपीसीबी के पूर्व अपर निदेशक डॉ. दीपांकर साहा ने कहा कि प्रदूषित शहरों की सूची में स्थान पाने वाले 22 शहर इंडो-गैगनेटिक प्लेन क्षेत्र में आते हैं। दिल्ली भी इसी क्षेत्र का हिस्सा है। इस क्षेत्र में आने वाले शहरों में धूल भरी हवाएं अधिक रहती है। वहीं, दिल्ली में 365 दिनों से केवल 30 से 32 दिन तक ही बारिश होती है। इसके अलावा बाकी दिन सूखे रहते हैं। यही वजह है कि दिल्ली के प्रदूषण को कम करने के लिए बारिश भी अपनी भूमिका नहीं निभा पाती है।
दिल्ली के प्रदूषण को कम करना है तो निजी वाहनों को छोड़कर सार्वजनिक वाहनों को बढ़ावा देना होगा। इससे पीएम 2.5 के उत्सर्जन में कमी आ सकती है। वहीं, खुले में कचरा आदि जलाने पर भी रोक लगानी चाहिए।
-डॉ. सुशील कुमार त्यागी, पूर्व अपर निदेशक, सीपीसीबी
-पीएम 2.5 कण अमूमन मनुष्य द्वारा की जाने वाली गतिविधियों से पैदे होते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि सरकार को प्रदूषण फैलानी वाली गतिविधियों पर रोक लगानी चाहिए। साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बेहतर इंतजाम होने चाहिए।
-डा. दीपांकर साहा, पूर्व अपर निदेशक, सीपीसीबी