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क्रेडिट कार्ड पर बोनस प्वाइंट का झांसा देकर ठगने वाले तीन गिरफ्तार

Mon, 31 May 2021 06:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • दो आरोपी कोविड के दौरान थे पैरोल पर जेल से बाहर
  • अब कोर्ट ने किया हुआ था भगोड़ा घोषित
  • सैकड़ों मामलों में शामिल हैं पकड़े गए आरोपी
  • देश के अलग-अलग हिस्सों में खोले गए खातों से जाकर निकालते थे रकम
  • चार राज्यों में पीछा कर पुलिस ने आरोपियों को दबोचा
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गिरफ्त में आरोपी... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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क्रेडिट कार्ड पर बोनस प्लाइंट देकर देशभर के 250 से अधिक लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले एक गैंग के तीन सदस्यों को उत्तरी जिला साइबर सेल से पकड़ा है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान गैंग सरगना तिलक नगर, दिल्ली निवासी विकास झा (31) और इसके दो सहयोगी गोकुलधाम, मथुरा, यूपी निवासी विक्की उर्फ हिमांशु उर्फ सोनू (27) और राजूपुर सादतपुर, कोतवाली, बिजनौर, यूपी निवासी अविनाश कुमार उर्फ  धुन्ना (36) के रूप में हुई है। 

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आरोपियों ने देश के कई राज्यों में फर्जी आईडी के आधार पर अकाउंट खोले हुए हैं। यह हवाई जहाज या कार से जाकर उन राज्यों में ठगी की रकम निकालते थे। आरोपियों के पास से 15 मोबाइल फोन, 39 सिमकार्ड, 12 बैंक खाते, पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड 85 हजार कैश और कुछ फर्जी आधार कार्ड बरामद किए हैं। आरोपी दूसरे राज्यों में जाने के दौरान पांच सितारा होटल में रात बिताते थे। कोविड के दौरान विकास और अविनाश जमानत पर बाहर आए थे। गुरुग्राम पुलिस ने विक्की के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया हुआ था।

उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त अंटो अल्फोंस ने बताया कि पिछले दिनों गृहमंत्रालय के वेब पोर्टल से उनके पास से एक शिकायत आई थी। पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया था कि उसके पास बिना ओटीपी आए क्रेडिट कार्ड से 37  हजार रुपये उड़ा लिये गए। बुराड़ी में इस संबंध में मामला दर्ज कर मामले की जांच जिले की साइबर सेल ने शुरू की। एसआई रोहित कुमार व अन्यों की टीम ने मामले की छानबीन शुरू की। पूछताछ के दौरान पीड़ित ने बताया कि क्रेडिट कार्ड पर प्वाइंट देने की बात कर उसके पास एक मैसेज आया था। एक लिंक पर उससे ईमेल व क्रेडिट कार्ड की डिटेल भरवाई गई थी। 
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पुलिस ने जांच की तो पता चला कि पीड़ित ने जानकारी देने के दौरान अपने मेल आईडी का पासवर्ड पर आरोपियों को बताया था। इसके बाद उसके खाते से निकाले गए रुपयों से गिफ्ट वाउचर खरीदने के बाद उनसे मोबाइल खरीदे गए। टेक्नीकल सर्विलांस की मदद से आरोपियों के खाते ही जांच की तो पता चला कि इन लोगों ने इसी तरह लाखों रुपये के मोबाइल और सोने के जेवरात नामी ज्वेलरी शोरूम से खरीदकर दूसरे एप के जरिये उनको बेचा हुआ था।

पुलिस ने करीब 100 मोबाइल नंबर की पड़ताल की। इसके बाद आरोपियों की पहचान सरगना विकास उसके साथी अविनाश और विक्की की पहचान की। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी विकास के खिलाफ दिल्ली, यूपी, हरियाणा समेत देश के कई राज्यों में ठगी के 21 और बाकी दोनों के खिलाफ पांच-पांच मुकदमें दर्ज हैं। जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने टेक्नीकल सर्विलांस से आरोपियों का पीछा करना शुरू किया। दिल्ली, यूपी, हरियाणा और चंडीगढ़ में पुलिस की टीमें आरोपियों का चार दिन तक पीछा करती रहीं। आखिर पुख्ता जानकारी जुटाने के बाद पहले कुरुक्षेत्र, हरियाणा से विकास झा और विक्की को दबोचा गया। दोनों कार से चंडीगढ़ से आगरा जा रहे थे। इसके बाद इनकी निशानदेही पर इनके तीसरे साथी को दबोचा गया। आरोपियों ने बताया कि यह बैंक से रकम निकालने के लिए पुणे, पंजी, बेंगलूरू, इंदौर, जयपुर, सूरत, चंडीगढ़, शिमला, आगरा, करनाल व ओडिशा समेत अन्य राज्यों में कैश निकालने जाते थे।

ऐसे दिया जाता था वारदात को अंजाम...
मास्टर माइंड विकास झा को कंप्यूटर का अच्छा ज्ञान था। वह एजुकेशन से जुड़ी वेबसाइट बनाकर उनको पीड़ितों के पास से उसका लिंक भेजता था। पीड़ित का डाटा बैंक से खरीदा जाता था। इस लिंक में केडिट कार्ड कार्ड में बोनस प्लाइंट का झांसा दिया जाता था। बाद में पीड़ित से धोखो से पूरा नाम, ईमेल आईडी-पासवर्ड, फोन नंबर, कार्ड की एक्सपायरी डेट, सीवीवी नंबर और जन्मतिथि भरवा ली जाती थी। इसके बाद बड़ी ही आसानी से कार्ड से पैसों का गिफ्ट वाउचर खरीदकर मोबाइल व सोना खरीदा जाता था। उनको बाद में एप के जरिये बेचकर उनकी रकम को देशभर में खोले गए फर्जी आईडी पर खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। कोविड के दौरान सीधे रकम की ट्रांसफर हो रही थी। उसके बाद रुपयों को दूसरे राज्यों में जाकर निकाल लिया जाता था। अपनी यात्रा के दौरान आरोपी हवाई जहाज और पांच सितारा होटल में रुकते थे। पुलिस के अनुसार आरोपी 250 से ज्यादा लोगों से करोड़ों की ठगी कर चुके हैं।

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