टूलकिट मामले में दिल्ली पुलिस की जांच में रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं। पहली टूलकिट की साजिश पर पर्दा डालने के लिए दूसरी टूलकिट तैयार की गई थी। हालांकि, दूसरी टूलकिट में भी ट्विटर पर तूफान लाकर बड़े पैमाने पर हिंसा फैलाने की साजिश थी। इसलिए आरोपियों ने किसान और उनके नेताओं से संपर्क किया। टूलकिट को तैयार करने वाली पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि की जमानत पर मंगलवार को फैसला सुनाया जाएगा।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया कि पहली टूलकिट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश व सरकार की छवि को खराब करने व बड़े पैमाने पर हिंसा करने की साजिश रची गई थी। पहली टूलकिट में देश को तोड़ने वाली बातें भी कहीं गई थीं। दिशा रवि ने इस टूलकिट को बिना संपादित किए हुए स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को भेज दिया था। जब तक इसे सोशल मीडिया से हटाया जाता तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पहली टूलकिट पर पर्दा डालने के लिए दूसरी टूलकिट तैयार की गई थी। दूसरी टूलकिट में देश विरोधी जैसी कोई बात नहीं की गई थी और वह साधारण थी। हालांकि, दूसरी टूलकिट में 14 व 15 फरवरी को बड़े पैमाने पर ट्विटर पर तूफान खड़ कर हिंसा फैलाने की साजिश जरूर थी। इससे किसानों को भी जोड़ा जाता, ताकि किसान प्रदर्शन स्थलों पर हिंसा हो सके। साजिश के तहत शांतनु को टीकरी बॉर्डर पर भेजा गया था। वह वहां कई दिन रहा था।
दिल्ली पुलिस अभी इस तथ्य की जांच कर रही है कि किसान नेताओं को आरोपी अपने साथ कैसे जोड़ते। शांतनु और निकिता जैकब से पूछताछ के बाद ही यह खुलासा हो पाएगा। दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट की कई टीमें मामले की जांच कर रही हैं।