हाईकोर्ट ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) को स्ट्रीट डॉग को खाना खिलाने के लिए राजधानी की कालोनियों में एक निश्चित स्थान व समय तय करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि इस काम में वह क्षेत्रीय रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन व पशु कल्याण संगठनों भी सहायता करेंगे। अदालत ने पुलिस को भी निर्देश दिया कि वह सुनिश्चित करे कि कुत्तों को खाना खिलाने वालों को कोई परेशान न करे और माहौल खराब न हो।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने यह निर्देश वंसत कुंज सेक्टर ई, पाकेट दो निवासी उर्वसी सहित तीन पशु प्रेमियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची ने तर्क रखा कि वे गली के कुत्तों को खाना खिलाने व उनकी देखभाल भी करते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी वे कुत्तों को खाना खिलाते हैं तो कालोनी में रहने वाले लोग आपत्ति करते हैं। याची के अधिवक्ता ने कहा कि उनकी मुवक्किलों ने कई बार शिकायतें कीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
वहीं कॉलोनी की आरडब्ल्यूए की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि उन्हें कुत्तों को खाना खिलाने पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन 18 दिसंबर 2009 को हाईकोर्ट द्वारा दिए आदेश का पालन होना चाहिए। इस आदेश के तहत कुत्तों को खाना खिलाने के लिए एक स्थान निश्चित किया जाना है और उस स्थान के अलावा कहीं भी खाना नहीं खिलाया जा सकता।
उन्होंने कहा कालोनी में बच्चें व बुर्जुग लोग घूमते है और कहीं भी खाना खिलाने के कारण कुत्तों द्वारा उनको काटने की संभावना बनी रहती है। वहीं डब्ल्यूबीआई के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि उनको मामले में पक्ष रखने का निर्देश नहीं मिला है।
अदालत ने कहा कुत्तों को खिलाने का उद्देश्य उन्हें किसी विशेष स्थान तक सीमित रखना है ताकि उन्हें नसबंदी/टीकाकरण के अधीन किया जा सके, क्योंकि टीकाकरण एक वर्ष से अधिक समय तक नहीं रहता।
अदालत ने उन्हें चार सप्ताह में उपयुक्त स्थान का चयन करने का निर्देश दिया है। एडब्ल्यूबीआई को निर्देश दिया कि कॉलोनी में 8 मार्च को मीटिंग बुलाए। इसमें आरडब्ल्यूए प्रतिनिधि, पुलिस व दोनों पक्षों के वकील उपस्थित रहेंगे। मीटिंग में सभी पक्ष मिलकर कुत्तों को खाना खिलाने के लिए स्थान तय करेंगे। अदालत ने कहा इसके बाद याची उसी स्थान पर कुत्तों को खाना देंगे व उसका उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए।