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बदल गए हालातः बॉर्डरों पर सुरक्षा बढ़ी, किसानों को कार्रवाई का डर

Fri, 29 Jan 2021 05:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  

सार

  • गाजीपुर बार्डर पर महज 20 फीसदी किसान, पुलिस कर सकती है बड़ी कार्रवाई
  • अस्थायी पब्लिक टॉयलेट प्रशासन ने उठवाए, बिजली भी काटी गई, तीन गुना बढ़ाई गई फोर्स
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गाजीपुर बॉर्डर... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन को 65 दिन हो गए हैं। 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद बृहस्पतिवार को गाजीपुर बॉर्डर पर नजारा बदला हुआ दिखाई दिया। यहां आम दिनों के मुकाबले महज 20 फीसदी किसाई ही दिखाई दिए। किसानों में उत्साह कम दिखाई दिया।  यहां बीती रात ही बिजली काट दी गई थी, जिस वजह से वहां मौजूद लोगों ने पूरी रात जागकर गुजारी। किसानो को तकरीबन यह एहसास हो चुका है कि उन्हें यहां से हटाने के लिए पुलिस कभी भी कार्रवाई कर सकती है। उधर, किसानों का कहना है कि वह किसी भी प्रकार की परिस्थिति के लिए तैयार हैं। 

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गाजीपुर बॉर्डर पर बृहस्पतिवार सुबह से ही हलचल रही। यहां रोजाना के मुकाबले तीन गुना फोर्स बढ़ा दी गई । गाजियाबाद नगर निगम के दस्ते ने आंदोलन स्थल के पास से आधे से से ज्यादा अस्थायी पब्लिक टॉयलेट भी उठा लिए हैं। यूपी के एडीजी राजीव सब्बरवाल, मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम, आईजी प्रवीण कुमार, डीएम अजय शंकर पांडे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी समेत कई बड़े अधिकारी घरना स्थल के आसपास मौजूद रहे।  

यहां दोपहर में यूपी पुलिस ने फ्लेग मार्च भी निकाला। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि कभी भी प्रशासन और यूपी पुलिस कार्रवाई कर सकती है। पुलिस की कार्रवाई की आशंका के चलते डर भी देखा गया। अमूमन जितने लोग आंदोलन स्थल के आसपास मौजूद रहते थे, उसके मुकाबले केवल 20 फीसदी लोग ही दिखे। कुछ किसान नेताओं ने मंच से जरुर कुछ देर के लिए भाषण दिया, लेकिन उनमें पहले जैसा जोश देखने को नहीं मिला। 
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लोगों की घटती संख्या पर  किसान नेताओं का तर्क है कि लोग अपने घर गए हैं, जो जल्द ही वापस लौट आएगें। पुलिस अपनी काम कर रही है और  आंदोलन यहां आगे भी जारी रहेगा। किसानों का कहना है कि वह किसी भी प्रकार की परिस्थिति के लिए तैयार हैं।  किसान नेता सुरविंदर सिंह ने कहा कि बुधवार रात से आंदोलन स्थल के आसपास की बिजली काट दी गई है। किसानों ने पूरी रात जागकर काटी। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने पानी के कुछ टैंकर भी हटा लिए गए हैं। किसानों को पानी कि किल्लत हो रही है।  सभी लोगों से कहा गया है कि धरना स्थल के आसपास कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है। इसलिए वह तैयार रहें।  


टीकरी बॉर्डर: सीमा पूरी तरह बंद, पैदल भी पार करना भी नहीं आसान
गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान हुए उपद्रव के बाद पुलिस ने टीकरी बॉर्डर पर भी सख्ती बढ़ा दी है। पुलिस बल की संख्या बढ़ाने के साथ बैरीकेड से होकर प्रदर्शन स्थल तक पैदल पहुंचना आसान नहीं था। सख्त तहकीकात के बाद ही पुलिसकर्मी किसी को बैरीकेड पार करने की इजाजत दे रहे थे। वहीं, बीते करीब दो महीने से शाम तक गुलजार रहने वाला मुख्य मंच बृहस्पतिवार शाम सूना पड़ा था।

ट्रैक्टर रैली में हिंसा के बाद बृहस्पतिवार को टिकरी बॉर्डर के मुख्य बैरीकेड का सख्त करने के साथ आस-पास की गलियों में भी बैरीकेड लगा दी गई। दिन भर पूरी तहकीकात के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा था। शाम के वक्त टीकरी पर किसानों के मंच पर पहले रौनक होती थी, लेकिन बृहस्पतिवार शाम यह खाली था। बॉर्डर के पार आंदोलन स्थल पर लोगों की मौजूदगी भी लगातार कम हो रही है।

पिछले करीब दो महीने से लगातार सीमा के बंद होने से लोगों को आने जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ट्रैक्टर रैली में शामिल सभी ट्रैक्टर लौट चुके हैं जबकि इनकी संख्या धीरे धीरे कम होती जा रही है। बॉर्डर पर पुलिस की मुस्तैदी और बढ़ा दी है। टीकरी बॉर्डर मेट्रो स्टेशन के बाहर सुरक्षा कर्मियों और बसों के अलावा सामान्य व्यक्ति की आवाजाही भी बंद कर दी गई थी। पहचान पत्र देखने के बाद केवल जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को ही प्रवेश की इजाजत दी गई जबकि दिल्ली में प्रवेश के लिए लोगों के लिए एकमात्र ग्राउंड का सहारा था।

गाजीपुर बॉर्डर पर धारा-144
ट्रैक्टर मार्च के बाद बृहस्पतिवार को यूपी और दिल्ली पुलिस दोनों ही एक्शन मोड में आ गए। दिल्ली पुलिस ने बॉर्डर इलाके मे धारा-144 लगाकर अपनी कार्रवाई शुरू कर दी। बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ाकर पुलिस बल की संख्या को बढ़ा दिया गया। वहीं दूसरी ओर गाजीपुर खाली कराने के दौरान दिल्ली व यूपी पुलिस ने एनएच-24 और एनएच-9 को गाजीपुर के पास से बंद कर दिया। इसकी वजह से एनएच-24 पर भारी जाम लग गया। पुलिस ने ट्वीट कर वाहन चालकों से दूसरे रास्तों का प्रयोग करने की सलाह दी।
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