गणतंत्र दिवस पर लालकिले पर लगाने के लिए धार्मिक झंडे लुधियाना से खरीदे गए थे। लुधियाना से भारी संख्या में धार्मिक झंडे खरीदकर दिल्ली लाए गए थे। 26 जनवरी से पहले ही इन्हें लाकर नई दिल्ली में एक जगह पर रखा गया था। यह बात दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की जांच में सामने आई है। अधिकारियों का कहना है कि लाल किला हिंसा में गिरफ्तार आरोपियों में कुछ खालिस्तान समर्थक या फिर ग्राउंड लेवल वर्कर हैं। यही बात दिल्ली पुलिस की जांच में पता चली थी।
विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध शाखा) प्रवीर रंजन ने बताया कि साजिश के तहत लालकिले पर झंडा लगाने वाला ग्रुप ही इन्हें पंजाब के लुधियाना से भारी संख्या में खरीदकर लाया था। झंडे तैयार करने के लिए काफी पहले ऑर्डर दे दिया गया था। दिल्ली पुलिस की एक टीम ने लुधियाना जाकर दुकानदार से पूछताछ व जांच की है।
लालकिला हिंसा में गिरफ्तार इकबाल सिंह ज्यादातर शीशगंज गुरुद्वारे में रुका था। वह 25 फरवरी के अलावा 22 व 23 फरवरी को भी शीशगंज गुरुद्वारे में गया था। उसने धार्मिक पोस्टर भी पंजाब में छपवाए थे। इन पोस्टरों पर धार्मिक नेताओं के फोटो व स्लोगन लिखे हुए थे। ये पोस्टर उसने सिंघु बॉर्डर पर लगाए थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, लालकिले पर किसी तरह का धार्मिक पोस्टर नहीं मिला है। इन्हें सिंघु बॉर्डर पर लगाकर फतह दिवस मनाने की तैयारी की गई थी। धार्मिक झंडा लगाने वाले कुछ आरोपी खालिस्तान की विचारधारा से सहमति रखते हैं। इनके आतंकियों के साथ संपर्क की भी जांच चल रही है।
देखा जा रहा है कि आरोपियों के व्हाट्स एप ग्रुप का एडमिन कौन है। दिल्ली पुलिस लालकिला हिंसा मामले में दीप सिद्धू व इकबाल सिंह समेत काफी आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस और खुफिया एजेंसियों की जांच-पड़ताल में इस मामले को लेकर लगातार खुलासे हो रहे हैं।