- एशियाड (1982) के दौरान शुरू हुई रिंग रेल की याद व अहमियत एक बार फिर दिल्ली सरकार को आई है। दिल्ली के फैलाव केसाथ रिंग रेल का दायरा भले ही छोटा दिखता हो लेकिन शहर केप्रमुख स्टेशनों व इलाकों को जोडता है।
- साउथ दिल्ली के स्टेशन-लाजपत नगर, सेवा नगर, लोधी कॉलोनी, सरोजनी नगर हॉल्ट, सफदरजंग, चाणक्यपुरी हॉल्ट, सरदार पटेल मार्ग हॉल्ट, बरार स्क्वायर, दिल्ली इंद्रलोक हॉल्ट, नारायणा विहार हॉल्ट, कृति नगर हॉल्ट, नारायणा विहार हॉल्ट।
- उत्तरी दिल्ली: निजामुद्दीन, प्रगति मैदान, तिलक ब्रिज, शिवाजी ब्रिज, नई दिल्ली, सदर बाजार, दिल्ली किशनगंज, विवेकानंद पूरी, दया बस्ती और शकूरबस्ती।
आंकड़ों में रिंग रेल:
- रिंग रेलवे चलाना लगातार घाटे का सौदा, मालगाड़ी चलाकर हो रही है भरपाई।
- लो कास्ट ट्रेन को चाहिए फास्ट ट्रैक व स्टेशन तक पहुंचने का रास्ता।
- रिंग रेल ट्रैक पर एक दर्जन ईएमयू कोविड के पहले चलती थी। जिसमें 90 प्रतिशत खाली रहती थी।
- पीक ऑवर में दोनों दिशाओं से 12 ट्रेन चलती थी।
- एक ट्रेन में एक साथ दो हजार से अधिक यात्री सफर कर सकते हैं, लेकिन यात्रियों की संख्या ढाई सौ से भी कम रहती है।
- दिल्ली का पूरा चक्कर यानी हजरत निजामुद्दीन से हजरत निजामुद्दीन का सफर 90 मिनट लगता है।
- लाइन बिछाई गई अक्तूबर 1975
- यात्री रेलगाड़ी का परिचालन अगस्त 1982
- शुरूआत में परिचालन 8 ईएमयू रेलगाडिय़ां
- एशियाई खेल के समय 24अतिरिक्त सेवा रेलगाडिय़ां
- रिंग रेलवे की कुल दूरी 35.34 किलोमीटर
- स्टेशनों एवं हाल्ट की संख्या 21
- स्टेशनों पर तय ठहराव 10-15 सेकेंड
विशेषज्ञ ने कहा- इच्छाशक्ति की जरूरत
इसमें कोई दो राय नहीं कि रिंग रेल दिल्ली की लाइफ लाइन बन शक्ति है। प्रदूषण मुक्त दिल्ली में सहयोगी बन सकती है तो दुर्घटना रहित यातायात व्यवस्था की सवारी भी हो सकती है। बस जरूरत है तो इच्छा शक्ति की। कमी यह है कि सरोजनी नगर, लाजपतनगर, बरार स्क्वायर समेत कई स्टेशन दिल्ली की पॉश इलाके से तो जुड़े है, लेकिन स्टेशन तक पहुंचने व वहां से बाहर जाने के लिए डीटीसी बस की सुविधा नहीं है।हालांकि, दिल्ली का परिदृश्य अब बदल गया है। आनंद विहार-निजामुद्दीन-पुरानी दिल्ली को कनेक्ट करने वाली नई रेल लाइन की अब जरूरत है। इस तरह से मेट्रो की पहुंच यहां तक बढ़ी है।
एके पूठिया, पूर्व महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे