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दिल्ली नगर निगम उपचुनावः सेमीफाइनल का संदेश, फाइनल के लिए दौड़ना पड़ेगा तेज

Thu, 04 Mar 2021 04:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

  • उपचुनाव में दिखाया तीनों दलों का आइना, रणनीतिक स्तर पर रखनी पड़ेगी चुस्ती, तभी मिलेगी एमसडी की सत्ता
  • आप को बढ़त बनाए रखने की चुनौती, भाजपा को नए सिरे से करनी होगी तैयारी, कांग्रेस की डगर भी नहीं आसान
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जीत का जश्न मनाते आप कार्यकर्ता... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बेशक दिल्ली के 272 वार्ड में से सिर्फ पांच वार्ड में उपचुनाव हुए हैं, लेकिन एमसीडी आम चुनाव के करीब एक साल पहले आए नतीजों ने दिल्ली की सियासत में हलचल पैदा की है। इसे दिल्ली की जनता का मूड माना जा रहा है। इस मामले में बढ़त पर आम आदमी पार्टी है जबकि कांंग्रेस भी एक सीट जीतकर वापसी की उम्मीद कर रही है। दूसरी तरफ आने वाला एक साल सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के लिए लेकर आया है। तीनों दलों के लिए उपचुनाव के अपने संदेश हैं।

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आप को बढ़त, बनाए रखनी होगी ऊर्जा
उपचुनाव में आप ने कांग्रेस व भाजपा पर बढ़त हासिल की है। अगले साल होने वाले एमसीडी के आम चुनाव के लिए अगर इसे सियासी संकेत माना जाए तो सिविक सेंटर की तरफ जाने वाला आप का रास्ता अब ज्यादा चौड़ा हो गया है। आप रणनीतिकारों को उम्मीद है कि दिल्ली सरकार के काम के भरोसे निगम की सत्ता हासिल की जा सकती है।

भाजपा के गढ़ माने जाने वाले शालीमार बाग के कब्जे में आने का आप नेता अपनी कामयाबी के तौर पर देख रहे हैं। इसे भाजपा के कैडर वोट में सेंध माना जा रहा है।  हालांकि, चौहान बांगड़ में कांग्रेस का उभार आप की चिंता भी बढ़ा रहा है। पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि अगले एक साल तक बेहद संजीदगी से काम करना पड़ेगा। खासतौर से शीर्ष नेतृत्व को पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्र्ताओं को जमीन पर एक साल तक एक्टिव रखना पड़ेगा।
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उपचुनाव में जिन पांच सीटों पर चुनाव हुए उसमें से एमसीडी 2017 आम चुनाव में आप को तीन सीटें मिली थी। बाद में रोहिणी सी के बीएसपी से पार्षद जयभगवान आप में शामिल हो गए थे। इस लिहाज से आप के पास चार और भाजपा के पास एक सीट थी। उपचुनाव में आप अपने चार के आंकड़े को बनाए रखने में कामयाब रही है। इसमें से एक सीट शालीमार बाग की भी है, जहां भाजपा को कोर वोटर ज्यादा है। दूसरी तरफ मुसलिम बहुल चौहान बांगड़ सीट को आप ने गवां दिया है। आप रणनीतिकार उपचुनाव की कामयाबी का जश्न मनाने के साथ चौहान बांगड़ सीट हारने की वजह भी तलाश रहे हैं। 

एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि पार्टी उपचुनाव को सेमीफाइलन मान रही है। इस लिहाज से चौहान बांगड़ के प्रदर्शन में जो भी खामियां मिलेंगी, उसकी भरपाई करने की तत्काल कोशिश होगी। पार्टी की कोशिश होगी कि किसी भी स्तर पर 2022 का मुकाबला त्रिकोणीय न होने पाए। इसकी जगह पर टक्कर आमने-सामने की रहे। इसके लिए आप को भाजपा के कोर वोटर में पैठ बढ़ाने की दिशा में काम करना पड़ेगा।

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भाजपा सेमीफाइनल हारी, कठिन है फाइनल की राह

एमसीडी उपचुनाव में भाजपा की करारी हार ने यह संकेत दे दिया है एमसीडी के सत्ता के गलियारों में रहना कठिन है। अगले साल एमसीडी चुनाव में सत्ता बचाना आसान नहीं रहेगा। तीनों एमसीडी में वापसी की राह आसान नहीं है और जिस तरह से आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव में वापसी की उसी तरह एमसीडी में भी सत्ता पर काबिज हो जाए। क्योंकि तीनों मुख्य पार्टी उपचुनाव को सेमी फाइनल चुनाव मानते हुए पूरे दम-खम के साथ सिर्फ पांच वार्ड में ताकत झोंक दी थी।

चौहान बांगर वार्ड की हार को भले ही भाजपा अल्पसंख्यक मतदाताओं का हवाला देकर बच सकती है, लेकिन दो पॉश वार्ड जिसमें शालीमार बाग व रोहिणी सी वार्ड शामिल है, यहां की हार का मायने यह भी है कि विधानसभा चुनाव की तरह ही भाजपा अपने कोर वोटर को अपने पक्ष में नहीं कर पाई। पूर्वी दिल्ली के दो वार्ड को देखे तो दोनो वार्ड भाजपा सांसदों का क्षेत्र है। बावजूद आप व कांग्रेस की जीत ने साबित कर दिया है कि लोकसभा व विधानसभा की तरह अगामी एमसीडी चुनाव में भाजपा का पक्ष मजबूत नहीं रहने वाला। 

चुनावी रणनीतिकारों की माने तो अब केंद्रीय नेतृत्व ही पिछले चुनाव की तरह कुछ करिश्मा दिखाए तो भाजपा की एमसीडी में शाख बच पाएगी। नहीं तो विधानसभा चुनाव की तरह ही नतीजा आ जाए तो इसमें अचरज नहीं। हालांकि कांग्रेस पार्टी का मुस्लिम मतदाओं के बीच चौहान बांगर वार्ड में पैठ बढ़ाना और अन्य वार्ड में भी थोड़ा बेहतर प्रदर्शन भाजपा को अगामी चुनाव में त्रिकोणीय चुनाव की आस जरूर जगी है। भाजपा के सियासदान यह भी मान रहे है कि एमसीडी पर बार-बार लगने वाले कथिल भ्रष्टाचार के आरोप से भी मतदाताओं का रूख भाजपा छोड़ अन्य पार्टियों के तरफ गया है।

दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस को दोबारा जमीन वापसी के संकेत
निगम उपचुनावों में एक सीट पर मिली जीत से दिल्ली में कांग्रेस का हौसला बढ़ा है। भले ही पांच में से एक सीट पर जीत मिली लेकिन इससे दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस के लिए दोबारा जमीन वापसी का संकेत माना जा रहा है। अब दिल्ली कांग्रेस की निगाहें 2022 में होने वाले निगम चुनाव में जीत दर्ज करने पर टिकी है।

चौहान बांगर में मिली जीत को कांग्रेस बड़ी जीत मान रही है। ऐसा इसलिए, क्योंकि पांच में चार वार्ड में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में भारी मतों के अंतर से मिली जीत को कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी के प्रति दिल्लीवासियों का रोष मान रही है। इस वार्ड पर हुई हार को आम आदमी पार्टी के अल्पसंख्यकों के सिखकते जनाधार का संकेत माना जा रहा है। 

अगर आगामी चुनावों में भी कांग्रेस अपने जनाधार को कायम रखती है तो पार्टी को एक बार फिर नई ताकत के साथ दिल्ली की राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकती है। पार्टी रणनीतिकार मान रहे हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय के बीच कांग्रेस का भरोसा बढ़ रहा है। इसे आगे ज्यादा मजबूत करना पड़ेगा। इसके आधार पर पार्टी एमसीडी आम चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
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