एमसीडी उपचुनाव में भाजपा की करारी हार ने यह संकेत दे दिया है एमसीडी के सत्ता के गलियारों में रहना कठिन है। अगले साल एमसीडी चुनाव में सत्ता बचाना आसान नहीं रहेगा। तीनों एमसीडी में वापसी की राह आसान नहीं है और जिस तरह से आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव में वापसी की उसी तरह एमसीडी में भी सत्ता पर काबिज हो जाए। क्योंकि तीनों मुख्य पार्टी उपचुनाव को सेमी फाइनल चुनाव मानते हुए पूरे दम-खम के साथ सिर्फ पांच वार्ड में ताकत झोंक दी थी।
चौहान बांगर वार्ड की हार को भले ही भाजपा अल्पसंख्यक मतदाताओं का हवाला देकर बच सकती है, लेकिन दो पॉश वार्ड जिसमें शालीमार बाग व रोहिणी सी वार्ड शामिल है, यहां की हार का मायने यह भी है कि विधानसभा चुनाव की तरह ही भाजपा अपने कोर वोटर को अपने पक्ष में नहीं कर पाई। पूर्वी दिल्ली के दो वार्ड को देखे तो दोनो वार्ड भाजपा सांसदों का क्षेत्र है। बावजूद आप व कांग्रेस की जीत ने साबित कर दिया है कि लोकसभा व विधानसभा की तरह अगामी एमसीडी चुनाव में भाजपा का पक्ष मजबूत नहीं रहने वाला।
चुनावी रणनीतिकारों की माने तो अब केंद्रीय नेतृत्व ही पिछले चुनाव की तरह कुछ करिश्मा दिखाए तो भाजपा की एमसीडी में शाख बच पाएगी। नहीं तो विधानसभा चुनाव की तरह ही नतीजा आ जाए तो इसमें अचरज नहीं। हालांकि कांग्रेस पार्टी का मुस्लिम मतदाओं के बीच चौहान बांगर वार्ड में पैठ बढ़ाना और अन्य वार्ड में भी थोड़ा बेहतर प्रदर्शन भाजपा को अगामी चुनाव में त्रिकोणीय चुनाव की आस जरूर जगी है। भाजपा के सियासदान यह भी मान रहे है कि एमसीडी पर बार-बार लगने वाले कथिल भ्रष्टाचार के आरोप से भी मतदाताओं का रूख भाजपा छोड़ अन्य पार्टियों के तरफ गया है।
दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस को दोबारा जमीन वापसी के संकेत
निगम उपचुनावों में एक सीट पर मिली जीत से दिल्ली में कांग्रेस का हौसला बढ़ा है। भले ही पांच में से एक सीट पर जीत मिली लेकिन इससे दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस के लिए दोबारा जमीन वापसी का संकेत माना जा रहा है। अब दिल्ली कांग्रेस की निगाहें 2022 में होने वाले निगम चुनाव में जीत दर्ज करने पर टिकी है।
चौहान बांगर में मिली जीत को कांग्रेस बड़ी जीत मान रही है। ऐसा इसलिए, क्योंकि पांच में चार वार्ड में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में भारी मतों के अंतर से मिली जीत को कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी के प्रति दिल्लीवासियों का रोष मान रही है। इस वार्ड पर हुई हार को आम आदमी पार्टी के अल्पसंख्यकों के सिखकते जनाधार का संकेत माना जा रहा है।
अगर आगामी चुनावों में भी कांग्रेस अपने जनाधार को कायम रखती है तो पार्टी को एक बार फिर नई ताकत के साथ दिल्ली की राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकती है। पार्टी रणनीतिकार मान रहे हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय के बीच कांग्रेस का भरोसा बढ़ रहा है। इसे आगे ज्यादा मजबूत करना पड़ेगा। इसके आधार पर पार्टी एमसीडी आम चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।