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कैदी और कानून : कोरोना के कारण छूटे बंदियों का गांधीगीरी से समर्पण कराएगी दिल्ली पुलिस 

Wed, 24 Mar 2021 04:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली 

सार

  • जमानत और पैरोल पर छूटे तीन हजार से अधिक बंदियों ने नहीं किया सरेंडर
  • पुलिस के आग्रह पर समर्पण करने वालों के खिलाफ नहीं होगी कार्रवाई
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Tihar Jail - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना काल में जमानत पर छोड़े गए बंदियों और पैरोल पर गए कैदियों में से ज्यादातर ने जेल में आत्मसमर्पण नहीं किया है। दिल्ली पुलिस अब गांधीगीरी के माध्यम से इन्हें सरेंडर कराएगी। उनका पता लगाकर कहा जाएगा कि वह सरेंडर कर दें। उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि, जो बंदी या कैदी आपराधिक वारदात में लिप्त पाए जाएंगे उनके खिलाफ कानून के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। पैरोल पर छोड़े गए कैदियों में बड़ी संख्या में काफी आपराधिक घटनाओं में लिप्त बताए जा रहे हैं।

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पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कोरोना को देखते हुए पिछले वर्ष करीब सात हजार बंदियों और कैदियों को जमानत व पैरोल पर छोड़ा गया था। उन्हें कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया था। जमानत व पैरोल की अवधि खत्म होने के बाद कुछ ने तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया है, जबकि तीन हजार से ज्यादा बंदी और कैदी अभी बाहर हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने पुलिस को आदेश दिए हैं कि वह इन बंदियों और कैदियों से संपर्क कर सरेंडर कराए। अब पुलिस इन सभी का पता लगाएगी कि वे कहां हैं। इसके बाद उनसे सरेंडर के लिए आग्रह करेगी। दक्षिण-पश्चिमी जिले में ऐसे करीब 160 कैदी हैं जिन्होंने अभी तक सरेंडर नहीं किया है। पुलिस ने इसे अभियान के तौर पर शुरू कर दिया है। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता चिन्मय बिश्वाल ने बताया कि जमानत और पैरोल पर छोड़े गए लोगों से सरेंडर कराया जा रहा है।
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जमानत पर छूटे कैदी बने सिर दर्द
अधिकारियों का कहना है कि कोरोना काल में जमानत पर बाहर आए काफी कैदी दिल्ली पुलिस के सिरदर्द बन गए हैं। इनमें कई गंभीर आपराधिक वारदात में लिप्त पाए गए हैं। ऐसे कैदियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

महिलाओं की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करने के आदेश
पुलिस आयुक्त ने आदेश दिए हैं कि महिलाओं की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। कापसहेड़ा थानाध्यक्ष अनिल मलिक द्वारा लापरवाही बरतने के बाद पुलिस आयुक्त ने ये आदेश दिए हैं। थानाध्यक्ष ने 14 वर्ष की लड़की के गायब होने की रिपोर्ट लिखने में काफी देरी कर दी थी। वह वेश्यावृत्ति कराने वाले गिरोह के चुंगल में फंस गई थी। अनिल मलिक को थानाध्यक्ष पद से हटाकर लाइन में भेज दिया गया है।

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