कोरोना वायरस के उपचार प्रोटोकॉल से प्लाज्मा को हटा दिया है। बावजूद इसके दिल्ली में आगे भी यह थेरेपी जारी रहेगी। हालांकि इसके लिए डॉक्टर को तीमारदार या मरीज की अनुमति लेनी होगी। इतना ही नहीं आईएलबीएस अस्पताल में बना सरकार का प्लाज्मा बैंक भी जारी रहेगा। बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि प्लाजमा थेरेपी को कोरोना के इलाज की स्पेसिफिक थेरेपी नहीं कहा गया है।
कोरोना का इलाज करने वाली जितनी भी दवाइयां चल रही हैं उनमें से कोई भी स्पेसिफिकली कोरोना का इलाज करने वाली दवाई नहीं है। ऐसी कोई दवाई नहीं है जिसके बारे में यह कहा जाए कि कोरोना इससे ठीक हो जाता है। जैसे कहते हैं कि बुखार उतारने के लिए पैरासिटामॉल की दवाई है। प्लाजमा थेरेपी विशेष तौर पर कोरोना का इलाज नहीं है, लेकिन डॉक्टर मरीज का इलाज करने पर इसकी मदद ले सकते हैं। यह डॉक्टर के ऊपर निर्भर करेगा कि प्लाज्मा थेरेपी की इलाज में मदद लेनी है या नहीं।
दरअसल प्लाज्मा थेरेपी को लेकर अभी भी सरकारों पर काफी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आईसीएमआर और एम्स ने मिलकर प्रोटोकॉल से प्लाज्मा थेरेपी को हटा लिया है लेकिन इससे अधिक उन्होंने और कोई जानकारी लिखित तौर पर नहीं दी है। पिछले वर्ष नवंबर माह में जब प्लाज्मा थेरेपी का परीक्षण परिणाम सामने आया था तब स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा था कि प्लाज्मा से काफी लोग ठीक हो रहे हैं।
उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए यहां तक कहा था कि मैक्स साकेत में उन्होंने भी प्लाज्मा लिया था और वह स्वस्थ्य हैं। हालांकि चिकित्सीय वर्ग स्वास्थ्य मंत्री के इस दावे से सहमत नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार सबूत आधारित चिकित्सा थेरेपी को मान्यता मिलना ही उचित है।