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दिल्ली : अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन कोटा तय, हाईकोर्ट ने सरकार की योजना को दी मंजूरी

Thu, 29 Apr 2021 05:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा  अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • दिल्ली सरकार ने हलफनामा दायर कर बताया कि किस अस्पताल को कितनी ऑक्सीजन दी है, और दी जाएगी
  • हर अस्पताल, सप्लायर को हर दिन अपने यहां स्टॉक का अपडेट देना होगा
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delhi high court - फोटो : PTI
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विस्तार
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राजधानी में ऑक्सीजन की कमी को को पूरा करने के लिए दिल्ली सरकार ने अस्पतालों के लिए कोटा तय कर दिया। इतना ही नहीं आपात स्थिति के लिए अलग से रिजर्व कोटा भी रखा है। हाईकोर्ट ने सरकार के अलॉटमेंट प्लान को लागू करने की मंजूरी दे दी।  

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न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ के समक्ष दिल्ली सरकार ने हलफनामा दायर कर बताया कि किस अस्पताल को कितनी ऑक्सीजन दी है, और दी जाएगी। सरकार ने बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार के फॉर्मूले के मुताबिक सभी सप्लायर्स को ऑर्डर दे दिया है। हर अस्पताल, सप्लायर को हर दिन अपने यहां स्टॉक का अपडेट देना होगा, साथ ही उस दिन उन्हें कितना ऑक्सीजन मिली ये भी बताना होगा।

अदालत ने पूछा यदि किसी अस्पताल को तुरंत जरूरत पड़ती है, तो इसपर वह क्या करेंगे। सरकार ने कहा कि उन्होंने 450मिट्रिक टन ऑक्सीजन का अलॉटमेंट पूर्वानुमान के आधार पर किया है। इतना ही नहीं उनके पास 20 मीट्रिक टन ऑक्सीजन रिजर्व रहेगी।
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अब जिन अस्पतालों के पास सिलेंडर की सुविधा है, उन सभी को एक-एक सप्लायर दिया गया है. हर रिफलर के लिए अस्पताल अपने सप्लायर से मदद ले सकता है, अगर वहां कुछ नहीं है तो उससे जुड़ा एक रिफलर रहेगा, जिससे मदद ली जा सकती है. 

नहीं झेल पा रहे हैं मरीजों का लोड 
सुनवाई के दौरान बत्रा अस्पताल से कहा कि दिल्ली में हालात बेकाबू हैं, ऐसे में आपको हालात संभालने होंगे। बड़ा अस्पताल होने के नाते आपको ऑक्सीजन का प्लांट लगाना चाहिए था, लेकिन किसी ने भी कोई काम नहीं किया है। अदालत ने अस्पताल के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उन्हें कोविड से नॉन कोविड अस्पताल बनने की परमिशन दी जाए, हम मरीजों का लोड नहीं संभाल पा रहे हैं।

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ऑक्सीजन व दवाओं की जमाखोरी न करने की अपील की

उच्च न्यायालय ने बुधवार को सभी लोगों से अपील की है कि वे कोविड-19 रोगियों के लिए आवश्यक ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाओं की जमाखोरी न करें। अदालत ने कहा कि इससे कृत्रिम कमी पैदा करने से बचा जा सकेगा और जरूरतमंद लोगों को यह सुविधा प्रदान की जा सकती है। साथ ही अदालत ने दिल्ली सरकार को सशस्त्र बलों की सेवाएं लेने का सुझाव भी देते हुए कहा है क्योंकि वे फील्ड अस्पताल स्थापित कर सकते हैं।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राज शेखर राव को मेडिकल ऑक्सीजन संकट और कोविड-19 महामारी से संबंधित अन्य मुद्दों से निपटने में सहायता के लिए अदालत का न्यायमित्र नियुक्त किया।

खंडपीठ ने कोरोना महामारी व ऑक्सीजन की कमी से निपटने के लिए  दिल्ली सरकार को सशस्त्र बलों की सेवाएं लेने के सुझाव की जांच करने को भी कहा है क्योंकि वे फील्ड अस्पताल स्थापित कर सकते हैं। अदालत ने कहा इससे राष्ट्रीय राजधानी में बड़ी संख्या में कोविड-19 रोगियों की मदद मिलेगी और उचित कदम उठाए जाएंगे। साथ ही राज्य सरकार से पिछले सात दिनों में किए गए आरटी-पीसीआर टेस्ट की संख्या और परीक्षणों में कमी के कारणों पर रिपोर्ट रखने को कहा है।

शवों के लिए एंबुलेंस की अपेक्षा डीटीसी बसों के उपयोग का सुझाव
शवों के लिए एंबुलेंस के प्रयोग की अपेक्षा डीटीसी की बसों के उपयोग का भी सुझाव सामने आया। दरअसल यह मुद्दा सामने आया कि मरीजों के लिए एंबुलेंस कम पड़ रही है क्योंकि श्मशान घाट में स्थान न होने के कारण उन्हें वहां काफी देर रुकना पड़ता है।

अस्पताल को किसी को भर्ती का आदेश नहीं
सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता ने कहा कि उनका रिस्तेदार की हालत गंभीर है लेकिन कहीं भी आईसीयू बैड उपलब्ध नहीं है। अदालत ने कहा कि जब अस्पताल में बेड नहीं है तो हम कैसे आदेश पारित कर सकते है। वकील ने पूछा कि फिर वे क्या करे। अदालत ने कहा कि वे मात्र सहानुभूति जताने के अलावा कुछ नहीं कर सकते।
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