उच्च न्यायालय ने बुधवार को सभी लोगों से अपील की है कि वे कोविड-19 रोगियों के लिए आवश्यक ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाओं की जमाखोरी न करें। अदालत ने कहा कि इससे कृत्रिम कमी पैदा करने से बचा जा सकेगा और जरूरतमंद लोगों को यह सुविधा प्रदान की जा सकती है। साथ ही अदालत ने दिल्ली सरकार को सशस्त्र बलों की सेवाएं लेने का सुझाव भी देते हुए कहा है क्योंकि वे फील्ड अस्पताल स्थापित कर सकते हैं।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राज शेखर राव को मेडिकल ऑक्सीजन संकट और कोविड-19 महामारी से संबंधित अन्य मुद्दों से निपटने में सहायता के लिए अदालत का न्यायमित्र नियुक्त किया।
खंडपीठ ने कोरोना महामारी व ऑक्सीजन की कमी से निपटने के लिए दिल्ली सरकार को सशस्त्र बलों की सेवाएं लेने के सुझाव की जांच करने को भी कहा है क्योंकि वे फील्ड अस्पताल स्थापित कर सकते हैं। अदालत ने कहा इससे राष्ट्रीय राजधानी में बड़ी संख्या में कोविड-19 रोगियों की मदद मिलेगी और उचित कदम उठाए जाएंगे। साथ ही राज्य सरकार से पिछले सात दिनों में किए गए आरटी-पीसीआर टेस्ट की संख्या और परीक्षणों में कमी के कारणों पर रिपोर्ट रखने को कहा है।
शवों के लिए एंबुलेंस की अपेक्षा डीटीसी बसों के उपयोग का सुझाव
शवों के लिए एंबुलेंस के प्रयोग की अपेक्षा डीटीसी की बसों के उपयोग का भी सुझाव सामने आया। दरअसल यह मुद्दा सामने आया कि मरीजों के लिए एंबुलेंस कम पड़ रही है क्योंकि श्मशान घाट में स्थान न होने के कारण उन्हें वहां काफी देर रुकना पड़ता है।
अस्पताल को किसी को भर्ती का आदेश नहीं
सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता ने कहा कि उनका रिस्तेदार की हालत गंभीर है लेकिन कहीं भी आईसीयू बैड उपलब्ध नहीं है। अदालत ने कहा कि जब अस्पताल में बेड नहीं है तो हम कैसे आदेश पारित कर सकते है। वकील ने पूछा कि फिर वे क्या करे। अदालत ने कहा कि वे मात्र सहानुभूति जताने के अलावा कुछ नहीं कर सकते।