कोरोना महामारी के कारण अब तक देश की राजधानी में कई स्वास्थ्य कर्मचारियों की मौत की जानकारी मिल चुकी है, लेकिन कागजों में इनका संख्या केवल दो है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, राजधानी से केवल दो ही आवेदन प्राप्त होने के बाद दोनों कोरोना योद्धाओं के परिजनों को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई है।
दूसरी ओर, इस मामले पर चिकित्सक वर्ग में भी सरकार के प्रति काफी नाराजगी है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अनुसार, अब तक देशभर में 750 से भी अधिक स्वास्थ्य कर्मचारियों ने कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में अपनी जान गंवा दी है, जबकि सरकारी कागजों में केवल 250 को ही कोरोना योद्घा घोषित किया गया है।
इसी तरह, अब तक दिल्ली में 17 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं, लेकिन कागजों में केवल दो ही कोरोना योद्धा हैं। मंत्रालय के अनुसार, 28 फरवरी तक राज्य सरकार से मिले दो आवेदन पर कोरोना योद्धाओं के परिजनों को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है।
एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि दिल्ली में कई ऐसे भी स्वास्थ्य कर्मचारी हैं, जिन्हें कोरोना संक्रमण हुआ, लेकिन उनकी ड्यूटी अस्पताल में नहीं थी। राज्यों से आए आवेदन के आधार पर ही केंद्रीय समिति आगे की प्रक्रिया करती है।
दिल्ली एम्स के डॉ. अमरिंदर सिंह मल्ही ने बताया कि उनके पास दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे देश में संक्रमण से मरने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों की सूची है। पिछले वर्ष अगस्त माह तक देश में 196 डॉक्टरों की मौत हुई थी। वहीं 30 नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ के लोग भी मारे गए। दिल्ली की बात करें तो अगस्त 2020 तक 10 पैरामेडिकल स्टाफ और नर्स की मौत हुई है।
वहीं 12 वरिष्ठ डॉक्टर भी कोरोना की वजह से जान गंवा चुके हैं। अगस्त 2020 से फरवरी 2021 के बीच के आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं। दिल्ली सरकार चाहे तो सूची लेकर अपने स्तर पर पड़ताल कर सकती है।
अमर उजाला के पास मौजूद दस्तावेज के अनुसार, इससे पहले 31 दिसंबर 2020 तक की सूची स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की थी, जिसमें दिल्ली से दो ही आवेदन मिलने की जानकारी थी। इस साल एक जनवरी से 28 फरवरी के बीच केंद्र सरकार को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। इसी पैकेज के तहत कोरोना योद्धाओं को आर्थिक मदद दी जाती है। इस मामले में दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग ने भी अब तक कोई जानकारी नहीं दी है।