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विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस आज : तंबाकू ही नहीं, लापरवाही भी है मुंह के कैंसर का कारण

Sat, 20 Mar 2021 05:29 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली

सार

  • मुंह के कैंसर से ग्रसित 25 फीसदी पुरुषों ने कभी नहीं किया धूम्रपान
  • पुरुषों में इस रोग की संभावना महिलाओं की तुलना में दोगुना
  • दिल्ली के अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने किया शोध
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विस्तार
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देशभर में हर साल कई लाख लोग मुंह के कैंसर (ओरल कैंसर) से ग्रसित हो जाते हैं। आम धारणा है कि यह कैंसर धूम्रपान, गुटका व तंबाकू खाने से होता है। हैरानी की बात यह है कि मुंह के कैंसर से पीड़ित 25 फीसदी पुरुषों ने उनके जीवन में कभी भी तंबाकू का सेवन या धूम्रपान नहीं किया है। बावजूद, वह कैंसर से ग्रसित हो गए। इसके पीछे है लापरवाही। इसलिए उन्हें यह रोग हो गया। दिल्ली के अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा किए गए शोध में यह खुलासा हुआ है।

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अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक प्रवीण कुमार गर्ग ने बताया कि पुरुषों में मुंह का कैंसर होने की संभावना महिलाओं के मुकाबले दो गुना अधिक होती है। पिछले कुछ सालों में मुंह के कैंसर के 25 फीसदी ऐसे मरीज मिले हैं, जिन्होंने कभी भी धूम्रपान नहीं किया और न ही गुटके का सेवन किया। हर साल ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसा ही एक मामला कुछ दिन पहले अस्पताल में आया था। कानपुर के रहने वाले 43 वर्षीय मरीज को जीभ का कैंसर था। उन्होंने जीवन में कभी भी शराब का सेवन व धूम्रपान नहीं किया था।

पिछले दो महीनों से रोगी की जीभ पर घाव बन गया था, जो ठीक नहीं हो रहा था। यह उसके नुकीले दांत के कारण हुआ था। बायोप्सी करने पर पता चला कि मरीज स्क्वैमय सैल कार्सिनोमा बीमारी से पीड़ित था, जो मुंह के कैंसर का सबसे मुख्य कारण है। रोगी की सर्जरी के द्वारा कैंसर को निकालने का फैसला लिया। सफल ऑपरेशन के बाद उसे दो दिन निगरानी में रखा गया और छुट्टी दे दी गई। 
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ओरल हाइजीन का ध्यान न रखने से हुआ कैंसर
डॉ. ने बताया कि मुंह के कैंसर के कई कारण हो सकते हैं। इनमें सबसे प्रमुख है ओरल हाइजीन यानी मुंह व दांतों को साफ न रखना। लंबे समय तक ठीक न होने वाले घाव कैंसर में बदल सकते हैं। ऐसे में अगर कोई नुकीला या टूटा दांत लगातार जीभ या मुंह की त्वचा को भेद रहा हो तो मुंह में घाव बन जाते हैं और इन घावों के कैंसर में बदलने की संभावना होती है। जिन 25 फीसदी पुरुषों ने कभी धूम्रपान नहीं किया था उन लोगों ने हाइजीन का ध्यान नहीं रखा था। इसलिए वह कैंसर से ग्रसित हो गए।

ऐसे करें बचाव
एम्स के डॉक्टर विक्रम बताते हैं कि सभी लोगों को कम से कम हर 6 महीने में मुंह की जांच करानी चाहिए। दांत और मुंह की ज्यादातर समस्याओं का निदान जांच के दौरान किया जा सकता है। घर पर ओरल हाइजीन का विशेष ध्यान रखें। दिन में दो बार दांत साफ करें। फाइबर युक्त आहार लें। चीनी युक्त पेय पदार्थों एवं गलत खानपान से बचें। दांत या मुंह में कोई भी घाव हो तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लें। 

ओरल कैंसर के लक्षण 

  • बिना किसी कारण नियमित बुखार आना
  • थकान होना। सामान्य गतिविधि करने से थक जाना
  • गर्दन में किसी प्रकार की गांठ होना
  • बिना कारण वजन का कम होना
  • मुंह में हो रहे छाले या घाव जो कि भर ना रहे हों
  • जबड़ों से रक्त का आना या जबड़ों में सूजन होना
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