Farmers Protest at Singhu Border
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किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले 320 से अधिक किसानों की याद में जनांदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय एनएपीएम की ओर से मिट्टी सत्याग्रह का आयोजन किया जा रहा है। पिछले 125 दिनों से चल रहे आंदोलन की गति बनाए रखते हुए अलग अलग राज्यों से कृषि, खाद्य सुरक्षा के अधिकार को बचाने के लिए संघर्षरत हैं। मिट्टी सत्याग्रह यात्रा छह अप्रैल को दिल्ली के टीकरी, सिंघु और गाजीपुर बॉर्डर पहुंचेगी। गांवों और शहरों से कलश में इकट्ठा मिट्टी आंदोलन में जान गंवाने वालों को समर्पित की जाएगी।
संयुक्त किसान मोर्चा के डॉ. दर्शन पाल के मुताबिक इस सत्याग्रह के जरिये प्राकृतिक संसाधनों सहित आजीविका को भी बचाने की कोशिश की जा रही है। यह मांग लोकतंत्र और संविधान के मूल्यवान ढांचे को बचाने के लिए भी है। अलग अलग राज्यों में विभिन्न संगठनों के सहयोग से गांवों, प्रमुख एतिहासिक स्थलों और आजादी के नायकों की प्रतिमाओं और संघर्ष के प्रतीकों से कलश में एक मुट्ठी मिट्टी इकट्ठा कर लोगों से संवाद भी किया जा रहा है।
मिट्टी सत्याग्रह यात्रा के तहत 12 से 28 मार्च तक महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, आसाम और पंजाब में जन संवाद अभियान चलाया जा रहा है। ये यात्रा 30 मार्च को दांडी से शुरू होकर गुजरात के विभिन्न जिलों से होकर, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के कई जिलों से होकर 5 अप्रैल की सुबह 9 बजे शाहजहांपुर बॉर्डर पहुंचेगी।
यात्रा के आखिरी दौर में पूरे देश से यात्रा दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचेंगी। शाहजहांपुर बॉर्डर से सत्याग्रही टीकरी पहुंचेंगे। छह अप्रैल की सुबह 9 बजे सिंघु बॉर्डर जबकि 4 बजे गाजीपुर बॉर्डर पहुंचेंगे। बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के सभी वरिष्ठ किसान साथी इस मिट्टी सत्याग्रह यात्रा में शामिल होंगे। इसके बाद तीनों सीमाओं पर शहीद स्मारक बनाए जाएंगे।