पिछले एक वर्ष के दौरान दिल्ली परिवहन निगम(डीटीसी) की 50 से अधिक बसें उपद्रव और हिंसा का शिकार हो चुकी हैं। इससे न केवल लाखों का नुकसान हुआ बल्कि संक्रमण से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग की अनिवार्यता से बसों की कमी कई गुना बढ़ गई है। इस वजह से बस स्टॉप पर सैकड़ों यात्रियों को रोजाना सुबह-शाम आधे से एक घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है।
डीटीसी के बेड़े की 3760 बसें सड़कों पर यात्रियों को सेवाएं दे रही हैं। कोरोना काल में बसों के परिचालन की शुरुआत बंदिशों के साथ की गई। पहले एक सीट छोड़कर यात्रियों को बैठने की इजाजत दी गई। बाद में राहत देते हुए यात्रियों को सभी सीटों पर बैठकर, यात्रा करने की इजाजत दे दी गई। बावजूद इसके बसों की सभी सीटें शुरुआती पांच स्टॉप से पहले ही फुल हो जहाती हैं। कुछ बसें 40-50 स्टॉप से होकर गुजरती हैं। ऐसे में आगे के सभी स्टॉप पर नीचे उतरने वाले यात्रियों के बराबर यात्रियों को ही प्रवेश की इजाजत दी जाती है।
जितने यात्री उतरे, उतने लोगों को ही मिली एंट्री
रूट संख्या 803 की बस सुबह करीब 9.45 बजे मधु विहार से शिवाजी स्टेडियम के लिए रवाना हुई। जनकपुरी सी ब्लॉक से जैसे ही बस आगे बढ़ी, लाजवंती चौक स्टॉप पर भी एक यात्री के उतरने के बाद एक को प्रवेश करने दिया गय। इसके आगे गुलाब हाऊस, मायापुरी चौक, पायल सिनेमा, शादीपुर में भी यात्रियों को प्रवेश नहीं मिल सका, क्योंकि उतरने वाले एक-दो ही थे। राजेन्द्र नगर, करोल बाग, झंडेवाला बस स्टॉप पर भी यात्रियों को उतरने के बाद ही बस में जगह मिली।
50 से अधिक बसें एक साल में हुईं क्षतिग्रस्त
दिल्ली में 26 जनवरी को हुए उपद्रव के दौरान 45 बसों को क्षतिग्रस्त किया गया। इससे लाखों का नुकसान होने के साथ साथ बसों की संख्या में भी कमी आई। पिछले साल भी सीएए-एनआरसी के विरोध के दौरान दिल्ली में हुई हिंसा और उपद्रव में पांच बसों को भारी नुकसान पहुंचाया गया था। हालांकि दौरान कुछ और बसों के शीशे भी तोड़ दिए गए थे। इससे भी डीटीसी को पांच लाख से अधिक का नुकसान हुआ।
50 फीसदी कम हुई बसें
डीटीसी के प्रबंध निदेशक विजय कुमार बिधूड़ी ने कहा कि यात्रियों को दिक्कत न आए इसकी पूरी कोशिश है। कम क्षतिग्रस्त हुई बसों को सड़क पर उतारा जा रहा है। फिलहाल सुरक्षाकर्मियों के लिए दिल्ली की सीमाओं पर भेजी जाने वाली बसों की संख्या में करीब 50 फीसदी की कमी हुई है। इन बसों को भी यात्रियों की सेवा में लगाया गया है। हाल ही में दिल्ली सरकार की ओर से जारी आदेश के बाद करीब बसें वापस ले ली गई थीं। अभी भी स्पेशल ड्यूटी पर 250 बसें लगी हुई हैं।