कोरोना संक्रमण से मौत की बढ़ती रफ्तार से श्मशान में शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं मिल रही है। शवों की संख्या अधिक होने की वजह से मोक्ष प्राप्ति के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है। द्वारका सेक्टर-24 के श्मशान में बृहस्पतिवार शाम तक 51 शवों की अंत्येष्टि के लिए पर्ची कटने के बाद मृतकों के परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए शुक्रवार सुबह तक इंतजार करने को कहा गया।
श्मशान में एंबुलेंस में शवों को लाने का सिलसिला सुबह ही शुरू हो गया। एंबुलेंस और निजी वाहनों में बिलखते परिजनों के चेहरे पर कोरोना का कहर साफ झलक रहा था। हर कोई एक-दूसरे को तसल्ली देने के साथ-साथ बीमारी को कोसते नजर आया। अंतिम संस्कार के लिए शवों की अधिक संख्या होने की वजह से पीपीई किट, मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन किया जा रहा था, लेकिन संस्था और निगम कर्मियों को इस बात की चिंता सता रही थी कि अगर शवों की संख्या और अधिक हुई तो उन्हें देर रात तक इंतजार करना पड़ सकता है। हर सुबह तीन-चार बजे श्मशान में पंडित और कर्मी पहुंचने लगते हैं। अगले दिन परेशानी न हो, इसलिए कर्मी भी शाम के बाद अगले दिन की तैयारी में जुट जाते हैं।
नानी के संस्कार के लिए बुलाया आज
द्वारका के एक निजी अस्पताल में नानी की कोरोना से मौत के बाद शव के अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे युवक ने पूछा कि संस्कार शाम के वक्त नहीं हो सकता। वहां मौजूद शवों को देखकर, उन्हें भी लगा कि रात के वक्त काफी देर हो सकता है, फिर अगले दिन के लिए बुलाया गया। इसी तरह के कई परिजन थे, जिन्हें शवों के अंतिम संस्कार की जल्दी थी, मगर जगह और वक्त न होने की वजह से कुछ परिजनों को सुबह बुलाना पड़ा।
पीपीई किट पहनते ही रोने लगा युवक
शवों के अंतिम संस्कार के लिए जा रहे एक युवक ने जैसे ही पीपीई किट पहनी तो हिम्मत जवाब दे गई। मोबाइल पर अपनी मां से कहने लगा कि अब हिम्मत नहीं। काफी मुश्किल के बाद ऑक्सीजन मिला, लेकिन अपने पिता को नहीं बचा सका। इससे आगे हिम्मत नहीं है। कुछ देर तक अकेले रहने के बाद फिर रिश्तेदारों के समझाने पर वह अंतिम संस्कार के लिए गया।
श्मशान से दूर ही पीपीई किट पहनकर पहुंचे संस्कार के लिए
कोरोना का डर इतना अधिक था कि लोग श्मशान से आधे किलोमीटर पहले ही कार से निकलकर पीपीई किट पहन रहे थे, ताकि संक्रमण का खतरा न रहे। अधिकतर लोग पीपीई किट में थे, लेकिन बगैर किट वाले भी कई लोग थे, जिनके माथे पर शिकन थी। दक्षिणी निगम के एक कर्मी ने बताया कि अंतिम संस्कार का काम एक संस्था की ओर से किया जा रहा है।
बीपीएल कार्ड धारकों का निशुल्क किया जा रहा है अंतिम संस्कार
संस्था के संदीप हुड्डा ने बताया कि रोजाना 50 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। बृहस्पतिवार को यह संख्या चार बजे के पहले पूरी हो गई। अचानक एक साथ कई एंबुलेंस पहुंच गई। बावजूद इसके, अधिक से अधिक शवों के अंतिम संस्कार करने में सभी लोग जुटे हुए हैं। अगर किसी बीपीएल कार्ड धारक की मौत हो जाती है, जिनके पास अंत्येष्टि के पैसे नहीं हैं तो एमसीडी के सहयोग से उनका अंतिम संस्कार निशुल्क भी किया जाता है।