दिल्ली विश्वविद्यालय केे स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग मेें अब नियमित कॉलेजों की तरह विद्यार्थियों का आंतरिक मूल्यांकन होगा। यह व्यवस्था चालू शैक्षणिक सत्र 2022-23 से लागू की जाएगी। विद्यार्थियों को असाइनमेंट लेेने व देने के लिए एसओएल नहीं जाना पड़ेगा। एसओएल तकनीक आधारित मूल्यांकन करने के बाद रिजल्ट परीक्षा शाखा को भेज देगा। इस व्यवस्था को लागू करनेे का प्रस्ताव आगामी 18 अगस्त को होने वाली कार्यकारी परिषद की बैठक में स्वीकृति के लिए लाया जा रहा है।
कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग की निदेशक डॉ. पायल मागो ने बताया कि अब कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग के तहत होनेे वाले यूजी-पीजी कोर्सेज में आंतरिक मूल्यांकन किया जाएगा। इस प्रस्ताव को पहले ही अकादमिक परिषद की बैठक सेे मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे कार्यकारी परिषद की बैठक में लाया जा रहा है। यहां से स्वीकृति मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। अब तक नियमित कॉलेज के विद्यार्थियों का ही आंतरिक मूल्यांकन होता है। संस्थान मूल्यांकन को तकनीक आधारित बनाएंगे। इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि उनका मूल्यांकन ऑनलाइन किया जाएगा।
डॉ. मागो ने बताया कि डिस्टेंस एजुकेशन बोर्ड का नियम है कि आंतरिक मूल्यांकन किया जाना चाहिए। इग्नू में भी आंतरिक मूल्यांकन किया जाता है। अभी तक हमें छूट मिली हुई थी, लेकिन अब कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग के तहत नए कोर्सेज लाए जा रहे हैं। ऐसे में हम यह छूट लेना नहीं चाह रहे हैं।
देश निर्माण में स्कूल शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान : डॉ. मलिक
दिल्ली विश्वविद्यालय का अपना एक स्कूल भी है, यह कम लोगों को ही पता है। यह स्कूल अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूरे करने जा रहा है। नॉर्थ कैंपस स्थित मौरिस नगर के पास इस स्कूल में शनिवार को स्वतंत्रता दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अंबेडकर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. नितिन मलिक रहे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और जीवन निर्माण में स्कूली शिक्षा की केंद्रीय भूमिका है। देश के प्रमुख पदों पर ऐसे विद्यालयों से निकले विद्यार्थी ही आसीन हैं।
इस अवसर पर उन्होंने बच्चों और अभिभावकों से बातचीत करते हुए कहा कि बच्चों को यहां से पास आउट होने के बाद भी अपने स्कूल को याद रखना है और शिक्षकों से निरंतर संपर्क में रहना है। इसमेें विशिष्ट अतिथि स्कूल प्रबंध समिति सदस्य डॉ प्रभांशु ओझा एवं प्रो मंजू गुप्ता रहे। इस अवसर पर बच्चे हाथों में तिरंगा लिए हुए थे। उन्होंने सांस्कृतिक व संगीतमय प्रस्तुतियां भी दीं।