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दिल्ली हाईकोर्ट : बीमा से जुड़े कर्मचारियों को अस्पताल और कार्यालय आने-जाने की छूट

Sun, 09 May 2021 04:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि कोविड-19 महामारी के दौरान चिकित्सा बीमा और स्वास्थ्य बीमा सेवाएं आवश्यक सेवाएं हैं।
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि कोविड-19 महामारी के दौरान चिकित्सा बीमा और स्वास्थ्य बीमा सेवाएं आवश्यक सेवाएं हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे में इनमें कार्यरत कर्मचारियों को अस्पतालों और उनके अपने कार्यालयों के बीच लॉकडाउन में भी आने-जाने की अनुमति रहेगी।

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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने मैक्स बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी की याचिका का निपटारा करते हुए से आदेश दिया है। याचिकाकर्ता ने दिल्ली सरकार द्वारा उनके कर्मचारियों के ई-पास के अनुरोध को अस्वीकार करने के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि 19 अप्रैल, 2021 के दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के आदेश के अनुसार, बीमा कंपनियों को श्रेणी 4 (एल) के तहत वर्गीकृत किया जाता है। 

इस प्रकार इसके कर्मचारियों को लॉकडाउन के दौरान स्वतंत्र रूप से आने-जाने के लिए ई-पास की आवश्यकता होती है। हालांकि, जब कर्मचारियों ने ई-पास के लिए आवेदन किया तो उनके सभी आवेदन बिना किसी कारण के खारिज कर दिए गए।
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दिल्ली सरकार ने कहा कि कर्मचारियों द्वारा पेश दस्तावेजों में विभिन्न विसंगतियों के कारण यह खारिज किया गया है। अदालत ने कहा डीडीएमए ने वैध पहचान पत्र/फोटो प्रवेश पास के आधार पर कुछ श्रेणियों के लोगों को प्रतिबंधों से छूट दी है। इनमें चिकित्सा कर्मी और अन्य अस्पताल सेवाएं जैसे जांच प्रयोगशालाएं, क्लीनिक, फार्मेसियों, दवा कंपनियां, चिकित्सा ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता, अन्य आकस्मिक सेवाएं आदि शामिल हैं।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों या मेडिक्लेम आदि से संबंधित दावों की प्रोसेसिंग और क्लीयरिंग से निपट रहे है। इसलिए उनकी सेवाएं उ न सेवाओं के लिए प्रासंगिक होंगी जिन्हें प्रतिबंधों से छूट दी गई है। कोविड-19 महामारी की स्थिति के दौरान चिकित्सा बीमा और स्वास्थ्य बीमा सेवाएं आवश्यक सेवाएं हैं।
 
अदालत ने कहा कि इस प्रकार याचिकाकर्ता कंपनी के कर्मचारियों को अस्पतालों और उनके अपने कार्यालयों के बीच स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि चिकित्सा बीमा दावों के प्रसंस्करण में तेजी लाई जा सके। इतना ही नहीं अदालत ने राय दी है कि महामारी के दौरान ई-पास को एक जटिल प्रक्रिया में शामिल करने से स्वास्थ्य बीमा सेवाओं में काफी देरी होगी। 

कोविड के दौरान अनाथ बच्चों की सुरक्षा के लिए याचिका

कोविड-19 के दौरान अनाथ हुए बच्चों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में ऐसे बच्चों की मानव तस्करी की आशंका जताई गई है। अदालत से केंद्र, दिल्ली सरकार, पुलिस व अन्य संस्थाओं को ऐसे बच्चों की पहचान करने व उनके निकटतम रिश्तेदार या फिर अनाथालयों में रखनेे का प्रबंध करने का निर्देश देने की मांग की है।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता जितेंद्र गुप्ता ने कहा कि कोविड-19 में ऐसे बहुत से बच्चे हैं जिन्होंने अपने-माता को खो दिया है। ऐसे बहुत बच्चे हैं जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में इन बच्चों के हितों की रक्षा करना जरूरी है क्योंकि वे मानव तस्करी का शिकार हो सकते हैं।

याचिका में उन मरीजों के परिवार के सदस्यों को उचित वित्तीय सहायता व मुआवजा देने का भी निर्देश देने की मांग की गई है, जिन्होंने अस्पताल में दाखिल होने पर ऑक्सीजन सिलिंडर, इंजेक्शन, दवाओं आदि के अभाव में इस महामारी में अपनी जान गंवाई है। 

याचिका में कहा गया है कि भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान राजधानी क्षेत्र में स्वास्थ्य देखभाल का बुनियादी ढांचा पूरी तरह से चरमरा गया है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से अप्रैल 2021 से शुरू से ही संबंधित पक्षों यानि केंद्र व दिल्ली सरकार की घोर लापरवाही और विफलता के कारण हजारों नागरिकों की असामयिक मृत्यु हुई है। 

उन्होंने कहा सभी को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है जिसमें वे फेल रही है। ऐसे में मृतकों के परिवार को मुआवजा जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ के समक्ष याचिका पर 10 मई को सुनवाई होगी।
 
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पुलिस दाखिले में करेगी परिवार को सहयोग, मकोका आरोपी को जमानत नहीं 

मकोका के तहत गिरफ्तार आरोपी ने अपने दो नाबालिग बच्चों का स्कूल में दाखिला करवाने के नाम पर अंतरिम जमानत मांगी। पुलिस ने जमानत अर्जी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पुलिस बच्चों को दाखिला करवाने में परिवार के सदस्यों का सहयोग करेगी। अदालत ने इस तथ्य के ध्यानार्थ आरोपी को जमानत प्रदान करने से इंकार कर दिया।

कडकड़ढूमा अदालत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव के समक्ष आरोपी नबीर उर्फ सब्बीर ने अपने दो नाबालिग बच्चों को स्कूल में दाखिले के लिए अंतरिम जमानत देने की मांग की है। उन्होंने कहा बच्चों का दाखिला न होने से वे पढ़ाई से वंचित होंगे ऐसे में उसे जमानत प्रदान की जाए। पुलिस ने जमानत पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप है और उसे जबरन वसूली के लिए अपराध सिंडिकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 

दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि याची के परिवार में अन्य सदस्य भी हैं, जो बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलवा सकते है। अदालत में मौजूद सहायक पुलिस आयुक्त (सीलमपुर) ने कहा कि पुलिस याची के परिजनों को बच्चों के स्कूल में प्रवेश दिलाने में सहायता करेगी, यदि परिवार के सदस्यों से इस संबंध में अनुरोध प्राप्त होता है। पुलिस के इस तर्क पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने संतुष्टी जताई। वहीं अदालत ने जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।
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