उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक वरिष्ठ चिकित्सक की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें डॉक्टरों और संबद्ध कर्मचारियों को वरिष्ठता और विशेषज्ञता की अनदेखी कर कोविड रोगियों के उपचार में एक ही श्रेणी में काम करने की दिल्ली सरकार की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। अदालत ने याची पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने फैसले में कहा कि जिस समय सरकार ने यह अधिसूचना जारी की, उस समय देश में महामारी से निपटने के लिए युद्ध जैसी स्थिति थी। इस अधिसूचना में किसी जीएनसीटी एक्ट का उल्लंघन नहीं दिखता, क्योंकि यह अपनी प्रकृति में अस्थायी है।
अदालत ने इस प्रकार से याचिका दायर करने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि किसी कोविड मरीज को दिल की बीमारी है तो उसकी देखभाल करना हृदयरोग विशेषज्ञ का ही कर्तव्य है। कोविड महामारी के दौरान ड्यूटी से छूट की मांग करना दुर्भाग्यपूर्ण है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता पायल बहल ने कहा कि उनके मुवक्किल ने कभी छूट नहीं मांगी और महामारी की अवधि में लगातार कर्तव्य निभाया।
तेग बहादुर अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एनएफएसजी) डॉ अजाजुर रहमान ने यह याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पायल बहल ने कहा कि 16 मई को जारी यह अधिसूचना भेदभाव पूर्ण है जिसमें एलोपैथिक, आयुर्वेदिक वरिष्ठ व कनिष्ठ डॉक्टरों को एक समान माना गया है। कनिष्ठ डॉक्टर कोरोना मरीज का इलाज उस तरह से नहीं कर सकते जिस तरह से वरिष्ठ डॉक्टर करते हैं। कनिष्ठ डॉक्टरों के इलाज करने से मरीज के जान को खतरा हो सकता है।
याचिकाकर्ता डॉक्टर ने कहा था कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा जाएगी और उसका असर नकारात्मक पड़ेगा। इस तरह की अधिसूचना जारी करने का अधिकार दिल्ली सरकार के न स्वास्थ्य मंत्री और ना ही स्वस्थ सचिव को है। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के अधिवक्ता अनुज अग्रवाल ने कहा कि इस अधिसूचना को जारी करने का उद्देश् मात्र सभी को समान मानकर कोविड महामारी से मिलकर लड़ने का है।
कोरोनिल का प्रचार रोकने की यायिका पर सुनवाई आज
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने बाबा रामदेव को पतंजलि की कोरोनिल के संबंध में झूठे बयान और झूठी जानकारी प्रसारित करने से रोकने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका पर आज न्यायमूर्ति सी हरि शंकर सुनवाई करेंगे। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिना किसी मान्यता के ही पंतजलि की कोरोनिल का प्रचार किया जा रहा है।
पिछले दिनों बाबा रामदेव द्वारा डॉक्टरों व उनके व्यवसाय के प्रति टिप्पणियां करने के बाद से उनके बीच राजनीति गमाई हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्ष वर्धन के हस्तक्षेप के बाद हालांकि बाबा रामदेव ने माफी मांग ली थी लेकिन दोनों पक्षों के बीच इसके बावजूद आरोप-प्रत्यारोप चल रहे है।