उच्च न्यायालय ने राजधानी के सभी अस्पतालों व नर्सिंग होम के चिकित्सा अधीक्षक, प्रबंधको व निदेशकों को एक अप्रैल से भर्ती सभी कोविड-19 रोगियों का पूरा विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि इस जानकारी में मरीज द्वारा कब्जे वाले बिस्तर की स्थिति और डिस्चार्ज की तारीख को भी दर्शाया जाना चाहिए। अदालत ने यह निर्देश निजी अस्पतालों में बेड के लिए मुंह मांगे दाम लेने के आरोप पर दिया है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ ने कहा कि ने इसे कदाचार की श्रेणी बताते हुए कहा कि बेड खाली नहीं होने के आरोपों की समीक्षा जरूरी है। हम जानते है कि हर कोई अपने मुनाफे को उच्च रखना चाहता है, यह गैर जिम्मेदार रवैया है। हमने इस पर विचार नहीं किया था। अदालत ने कहा कि आप इस प्रकार से 10 कमरे कम कर सकते है। यह उचित नहीं है।
खंडपीठ ने मामले में अदालत की सहायता के लिए नियुक्त न्याय मित्र राजशेखर राव को अस्पतालों के लिए एक फार्मेट तैयार करने को कहा है ताकि चार दिन के भीतर उक्त जानकारी जमा की जा सके। वहीं दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया है कि एक मई तक दिल्ली में कुल 20,938 कॉविड बेड हैं, जिनमें वेंटिलेटर के साथ साधारण बेड, ऑक्सीजनयुक्त बेड, आईसीयू बेड और आईसीयू बेड शामिल हैं।
अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट नहीं होना गैर जिम्मेदाराना: हाईकोर्ट
राजधानी के अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट नही होना गैर जिम्मेदाराना है। यह बात उच्च न्यायालय ने ऑक्सीजन किल्लत से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए शनिवार को कही। उच्च न्यायालय ने कहा कि अस्पतालों को मौजूदा कोरोना महामारी के दौरान आए ऑक्सीजन संकट से जुड़े अपने अनुभवों से सबक लेना चाहिए। उन्हें अपने यहां अनिवार्य तौर पर आक्सीजन संयंत्रों की स्थापना करनी चाहिए। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि कुछ अस्पताल, खासकर बड़े अस्पताल पैसे की बचत के दृष्टिकोण से ऑक्सीजन संयंत्रों जैसी चीजों पर पूंजी कम लगाते हैं जो एक अस्पताल में आवश्यक हैं।
दिल्ली सरकार ने कोरोना महामारी के चलते द्वारका में बनने वाले इंदिरा गांधी सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल को जल्द शुरु करने का निर्णय लिया है। सरकार ने हाईकोर्ट को यह जानकारी देते हुए बताया कि अस्पताल में नर्सिंग व अन्य अधिकारियों की तैनानी शुरू कर दी है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ ने द्वारका बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वाईपी सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर द्वारका के सेक्टर 9 में 1700 बिस्तर वाले इस अस्पताल को शुरू करने के बारे में स्थिति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने अब सुनवाई 6 मई तय की है।
सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा कि इसे जल्द शुरू करने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने इस अस्पताल में नर्सिंग अधिकारी, कर्मचारियों की तैनाती के लिए आदेश भी जारी कर दिया है। इससे पहले उन्होंने बताया कि अस्पताल में बिजली की समस्या है और उसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता यशवर्धन सोम ने खंडपीठ को बताया कि द्वारका में लाखों लोग रहते हैं, लेकिन इलाके में कोई सरकारी अस्पताल नहीं है। याचिका में कहा गया है कि इंदिरा गांधी अस्पताल बनकर तैयार है और पिछले साल मार्च में ही शुरू होना था, लेकिन आज तक नहीं हुआ। साथ ही कहा गया है कि कोरोना महामारी में सरकार के पास बेड की कमी है, इसकी कमी से लोगों की जाने जा रही है, बावजूद इसके सरकार इस अस्पताल को शुरू नहीं कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार बिजली की समस्या जनरेटर से पूरी कर सकती है या फिर बिजली कंपनी को बिजली सप्लाई के लिए कह सकती है। याचिका में इस अस्पताल में वकीलों के लिए 500 बेड, न्यायिक अधिकारियों के लिए 50 और कोर्ट कर्मचारियों के लिए 150 बेड आरक्षित करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण से पीड़ित वकीलों, न्यायिक अधिकारियों को समुचित इलाज नहीं मिल रहा है। इसलिए इस अस्पताल में बेड आरक्षित किए जाने चाहिए।